
2 लाख निवेशकों से 500 करोड़ की ठगी, LUCC को-ऑपरेटिव सोसाइटी के मामले CBI को सौंपे जाएंगे..
उत्तराखंड: निवेशकों के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के आरोपों से घिरी द लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) के खिलाफ अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जांच करेगी। केंद्र सरकार ने इस बहु-राज्यीय ठगी मामले को सीबीआई को सौंपने की मंजूरी दे दी है। LUCC सोसाइटी पर आरोप है कि उसने आरडी (आवर्ती जमा), एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट), और एमआईपी (मंथली इनकम प्लान) जैसी योजनाओं के नाम पर करीब 2 लाख निवेशकों से 500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई और उसके बाद भुगतान करने से इंकार कर दिया।
इस सोसाइटी के खिलाफ उत्तराखंड के सात जिलों में धोखाधड़ी और विश्वासघात के मामले दर्ज हैं। इसके साथ ही दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान सहित अन्य राज्यों में भी इसी तरह की शिकायतें सामने आई हैं। LUCC को-ऑपरेटिव सोसाइटी ने अपने प्रचार में सहकारिता मंत्रालय से जुड़ी संस्था होने का दावा किया था, जिससे निवेशकों में विश्वास पैदा हुआ। लेकिन अब सामने आ रहा है कि यह एक सुनियोजित वित्तीय धोखाधड़ी का नेटवर्क था, जिसमें योजनाबद्ध तरीके से जनता की मेहनत की कमाई हड़प ली गई। केंद्र सरकार द्वारा सीबीआई को जांच सौंपने के निर्णय से इस घोटाले की गहराई से जांच और देशभर में फैले नेटवर्क के पर्दाफाश की उम्मीद है। इससे पीड़ित निवेशकों को न्याय मिलने की भी संभावनाएं बढ़ गई हैं। LUCC घोटाला देश के उन कई बहु-राज्यीय सहकारी घोटालों में से एक है, जो सरकारी नाम और भरोसे का दुरुपयोग कर आम जनता को निशाना बनाते हैं। सीबीआई जांच से इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आने और साजिशकर्ताओं को सजा दिलाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
अधिकांश शिकायतों में LUCC पर आरोप है कि उसने झूठे दस्तावेजों और सहकारिता मंत्रालय से जुड़े होने के फर्जी दावों के जरिए निवेशकों को भरोसे में लिया और उनसे RD, FD और MIP जैसी योजनाओं में निवेश करवाया। इस तरह करीब 2 लाख लोगों से 500 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई। शिकायतों के अनुसार सोसाइटी ने खुद को केंद्र सरकार के सहकारिता मंत्रालय से संबद्ध बताकर लोगों को गुमराह किया। निवेशकों को फर्जी दस्तावेज और आकर्षक रिटर्न का वादा करके रकम जमा करवाई गई। लंबे समय से पैसे वापस न मिलने पर निवेशक विभिन्न राज्यों में एफआईआर दर्ज करवा रहे थे।