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दून पुस्तकालय में रजत जयंती सप्ताह पर होंगे विशेष कार्यक्रम, समाज और युवा विकास पर रहेगा फोकस..

 

 

उत्तराखंड: मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय में दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की चौथी जनरल बॉडी मीटिंग आयोजित की गई। बैठक में पुस्तकालय से संबंधित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने सुझाव दिया कि दून पुस्तकालय को रविवार को भी खुला रखा जा सकता है, ताकि अधिक से अधिक बच्चे और युवा इसका लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय केवल पढ़ाई तक सीमित न रहे बल्कि युवाओं के लिए नए अवसरों का केंद्र बने। मुख्य सचिव ने दून पुस्तकालय में नियमित रूप से विदेशी भाषाएं सीखने के कार्यक्रम शुरू करने की संभावनाएं तलाशने को कहा। उनका कहना था कि राज्य सरकार लगातार युवाओं के लिए विदेशों में रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है, ऐसे में विदेशी भाषा सीखना युवाओं के लिए लाभकारी होगा। बैठक में दून पुस्तकालय को और अधिक सुगम व आधुनिक सुविधाओं से लैस करने पर भी चर्चा हुई, ताकि यह न केवल छात्रों और शोधार्थियों बल्कि आम नागरिकों के लिए भी उपयोगी साबित हो।

सचिवालय में हुई बैठक में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को वैश्विक अवसरों से जोड़ने के लिए विदेशी भाषाओं की शिक्षा पर जोर देना जरूरी है। उन्होंने दून पुस्तकालय को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने के प्रयास करने को कहा। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर दून पुस्तकालय में 1 से 9 नवम्बर तक रजत जयंती सप्ताह आयोजित किया जाएगा। इस दौरान विभिन्न विशेष कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। बैठक के दौरान कहा गया कि पुस्तकालय द्वारा बाल वर्ग और युवाओं दोनों के लिए शैक्षिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की योजना बनाई गई है। बाल वर्ग के लिए भाषा ज्ञान, नाटक, कहानी, पर्यावरण और संस्कृति जैसे विषयों पर कार्यक्रम आयोजित होंगे। युवाओं के लिए पर्यावरण, साहित्य, भाषा, इतिहास और संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। अधिकारियों ने कहा कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को शिक्षा, साहित्य और संस्कृति से जोड़ना है, साथ ही उन्हें नई भाषाओं और कौशल सीखने के अवसर भी प्रदान करना है। इसके साथ ही आम जनता के लिए समाज और मानसिक स्थिति, महिला सशक्तिकरण, उपभोक्ता संरक्षण और कानून, वास्तुकला और परिवर्तन, पहाड़ों में खेती का उजाड़ होना आदि विषयों पर भी कार्यक्रम आयोति किए गए हैं। इस अवसर पर प्रो. बी. के. जोशी, सुभाष कुमार, एस. के. मट्टू एवं एन. रविशंकर सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

 

 

 

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