छात्रों को नया सत्र शुरू होने से पहले मिलेंगी पाठ्य पुस्तकें, शिक्षा विभाग ने शुरू की तैयारी..
उत्तराखंड: उत्तराखंड के सरकारी और अशासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों छात्र-छात्राओं के लिए अच्छी खबर है। शिक्षा विभाग अब यह सुनिश्चित करने जा रहा है कि नया शिक्षा सत्र 2026–27 शुरू होने से पहले ही सभी छात्रों को मुफ्त पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध करा दी जाएंगी। लंबे समय से चली आ रही देरी की समस्या को दूर करने के लिए विभाग ने विशेष तैयारी शुरू कर दी है। फिलहाल स्थिति यह रही है कि कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों को सरकार की ओर से मिलने वाली मुफ्त पुस्तकों के लिए कई महीनों तक इंतजार करना पड़ता था। सिस्टम की सुस्ती और वितरण में देरी के कारण कई बच्चे बिना किताबों के स्कूल आते थे। इस समस्या को देखते हुए विभाग ने पहले स्कूलों में लाइब्रेरी स्थापित कर पुरानी किताबें उपलब्ध कराने की व्यवस्था की थी, ताकि छात्र कुछ हद तक पढ़ाई जारी रख सकें। इसके बावजूद सभी छात्रों तक समय पर नई पुस्तकों की आपूर्ति नहीं हो पा रही थी। इसी को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा मंत्री ने निर्देश जारी किए हैं कि कोई भी छात्र बिना पुस्तक के न रहे, और पाठ्य पुस्तकों की छपाई व वितरण की प्रक्रिया अभी से तेज कर दी जाए। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस बार पुस्तक वितरण में देरी न हो, इसके लिए प्रिंटिंग, स्टॉक मैनेजमेंट, परिवहन और स्कूल-स्तर पर वितरण की योजना पहले ही तैयार की जा रही है। विभाग का लक्ष्य है कि सत्र शुरू होते ही सभी छात्रों के हाथों में नई किताबें हों, जिससे पढ़ाई में किसी भी तरह की बाधा न आए। सरकार के इस कदम से प्रदेश के लाखों बच्चों को बड़ा फायदा होगा और शिक्षा व्यवस्था में समयबद्धता व पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने इस संबंध में निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण को पत्र भेजकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिक्षा सत्र 2025–26 में कक्षा 1 से 12 तक के सभी छात्रों को 15 मार्च 2026 तक मुफ्त पुस्तकों का वितरण पूरा कर दिया जाए। पत्र में कहा गया है कि शिक्षा मंत्री के निर्देश के अनुसार पाठ्य पुस्तकों की सॉफ्ट कॉपी 10 दिन के भीतर माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को उपलब्ध कराना अनिवार्य है, ताकि समय पर छपाई, पैकिंग और वितरण की प्रक्रिया शुरू की जा सके। प्रदेश में हर वर्ष लाखों छात्रों को मुफ्त पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती हैं, लेकिन राज्य गठन के बाद अधिकांश वर्षों में छात्र समय पर किताबों से वंचित रहे हैं। एक-दो वर्षों को छोड़ दें, तो लगभग हर साल पुस्तकों के वितरण में देरी होती आई है, जिसके कारण छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती रही। इस बार शिक्षा मंत्री ने प्रक्रिया में सुधार के लिए पहले ही अलर्ट मोड में काम करने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश के 16 हजार से अधिक स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 8.5 लाख छात्रों को समय पर पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए तैयारी अभी से शुरू कर दी गई है। विभाग प्रिंटिंग एजेंसियों, लॉजिस्टिक व्यवस्था और स्कूल-स्तर पर वितरण प्रणाली को समयबद्ध तरीके से संचालित करवाने में जुट गया है। शिक्षा विभाग का कहना है कि नए सत्र से पहले किताबें उपलब्ध होने से न केवल छात्रों का शैक्षणिक नुकसान रुकेगा, बल्कि स्कूलों में पढ़ाई की नियमितता और गुणवत्ता भी बढ़ेगी।
