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तरसाली में बुजुर्ग और ग्रामीण मिलकर कर रहे मोटरमार्ग निर्माण, श्रमदान से राहत की उम्मीद..

 

 

 

उत्तराखंड: रुद्रप्रयाग जनपद के केदारघाटी क्षेत्र में स्थित तरसाली गांव के ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे गया है। महीनों से ठप पड़े मोटरमार्ग निर्माण कार्य से निराश ग्रामीणों ने प्रशासन और ठेकेदार का इंतजार छोड़कर अब खुद ही सड़क निर्माण का जिम्मा उठा लिया है। गांव में इन दिनों एक अलग ही नज़ारा देखने को मिल रहा है, जहां बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, सभी कुदाल-फावड़ा लेकर सड़क कटान और समतलीकरण में जुटे हुए हैं। तरसाली गांव को सड़क से जोड़ने के लिए वर्ष 2021 में करीब तीन किलोमीटर लंबे मोटरमार्ग को स्वीकृति मिली थी। यह सड़क फाटा के समीप केदारनाथ हाईवे से गांव तक बनाई जानी थी।

शुरुआत में निर्माण कार्य ने रफ्तार पकड़ी और ठेकेदार द्वारा लगभग दो किलोमीटर सड़क तैयार भी कर ली गई, लेकिन इसके बाद काम अचानक धीमा पड़ गया। ग्रामीणों के अनुसार इस वर्ष मार्च माह से शेष लगभग एक किलोमीटर मोटरमार्ग का निर्माण कार्य पूरी तरह बंद पड़ा है। न तो मशीनें साइट पर दिखती हैं और न ही मजदूर। कई महीनों तक काम आगे न बढ़ने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती चली गई। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में कई बार जनप्रतिनिधियों, जिलाधिकारी और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से लिखित और मौखिक शिकायतें कीं, लेकिन आश्वासनों के साथ ही कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जब निर्माण कार्य दोबारा शुरू नहीं हुआ, तो ग्रामीणों ने खुद पहल करने का फैसला लिया।

अब गांव के लोग श्रमदान के जरिए सड़क बनाने में जुट गए हैं। कोई पहाड़ी काट रहा है, तो कोई मलबा हटा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क केवल सुविधा नहीं, बल्कि गांव की जीवनरेखा है। सड़क न होने से आपात स्थिति में मरीजों को ले जाना, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना बेहद मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों ने साफ कहा कि जब तक संबंधित विभाग और ठेकेदार शेष कार्य पूरा नहीं करते, तब तक वे अपने स्तर से सड़क को चलने लायक बनाने का प्रयास जारी रखेंगे। तरसाली गांव में श्रमदान से सड़क निर्माण का यह मामला एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में अधूरी परियोजनाओं और कमजोर निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर निर्माण कार्य पूरा हो जाता, तो उन्हें यह कदम उठाने की जरूरत नहीं पड़ती। अब यह देखना होगा कि ग्रामीणों की इस पहल के बाद प्रशासन और संबंधित विभाग हरकत में आते हैं या फिर गांववासी अपने श्रम के बल पर ही अपनी राह खुद बनाते रहेंगे।

लोक निर्माण विभाग ऊखीमठ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली इस मोटरमार्ग की लंबित कटिंग कार्य की वजह से गांववासियों को रोजमर्रा की जिंदगी में कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने के कारण गांव से पलायन बढ़ रहा है। जंगली रास्ते के चलते न केवल आवागमन कठिन हो रहा है, बल्कि जंगली जानवरों का खतरा भी लगातार बना हुआ है। ऐसे हालात में जब शासन-प्रशासन की ओर से ठोस पहल नहीं हुई, तो ग्रामीणों ने अपने स्तर पर सड़क निर्माण में श्रमदान करने का निर्णय लिया। बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक सभी कुदाल-फावड़ा लेकर कटिंग और समतलीकरण में जुटे हैं। तरसाली के ग्रामीण धर्मानंद सेमवाल और प्रियधर अंथवाल ने कहा कि गांव के लिए स्वीकृत मोटरमार्ग की कुल लंबाई तीन किलोमीटर है।

इसमें अब तक लगभग दो किलोमीटर कटिंग कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि शेष लगभग 800 मीटर की कटिंग अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों का यह श्रमदान न केवल गांव के लिए, बल्कि प्रशासन को संदेश देने वाला कदम भी है। जानकारी के अनुसार तरसाली मोटरमार्ग पर कार्य प्रारंभ करने के लिए मशीनें भेज दी गई हैं। इसके साथ ही नेशनल हाईवे (एनएच), लोनिवि और भूवैज्ञानिक (Geologist) की संयुक्त टीम द्वारा सड़क का निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण के बाद ही शेष कटिंग और सड़क निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा। ग्रामीणों का मानना है कि यदि शेष कार्य जल्द पूरा हो गया, तो यह गांववासियों के जीवन में राहत लेकर आएगा। सड़क बनने से आवागमन आसान होगा, जंगली जानवरों का खतरा कम होगा और पर्वतीय क्षेत्र में पलायन की प्रवृत्ति पर भी काबू पाया जा सकेगा।

 

 

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