भगवान रुद्रनाथ की नगरी में भक्तों ने किया कालीमाई की देवरा यात्रा का स्वागत..

भगवान रुद्रनाथ की नगरी में भक्तों ने किया कालीमाई की देवरा यात्रा का स्वागत..

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड के धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन में गुरुवार को सिद्धपीठ कालीमठ की कालीमाई की देवरा यात्रा रुद्रप्रयाग पहुंची। अगस्त्यमुनि से प्रस्थान कर रही इस पारंपरिक यात्रा का स्वागत नगर में विभिन्न स्थानों पर भक्तों ने फूलों की वर्षा कर किया। जय मां कालीमाई के जयकारों से नगर के प्रमुख मार्गों और गलियों में उत्सव का माहौल बन गया। बद्री-केदार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण ने नगर में देवरा यात्रा का भव्य स्वागत किया। अलकनंदा और मंदाकिनी के संगम तट पर स्थित मां चामुंडा देवी एवं भगवान रुद्रनाथ मंदिर की परिक्रमा के बाद कालीमाई की डोली नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए नगर पालिका पार्किंग और मुख्य बाजार क्षेत्र में पहुंची, जहां बड़ी संख्या में भक्तों ने फूल मालाओं और भजन-कीर्तन के माध्यम से देवी का स्वागत किया।

कालीमाई पंचगाई समिति के अध्यक्ष लखपत राणा ने कहा कि यह देवरा यात्रा 15 वर्षों के बाद कालीमठ से निकली है। यात्रा के दौरान देवी जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में भक्तों के घर-घर जाकर उनकी कुशलता पूछ रही हैं। प्रत्येक पड़ाव पर भक्तों ने बड़ी श्रद्धा और भक्ति भाव से डोली का स्वागत किया। विशेष रूप से रामपुर, तिलवाड़ा, भटवाड़ीसैण और बेलनी सहित अन्य मार्गों में स्थानीय लोगों ने फूल मालाओं और नारियल चढ़ाकर देवी का अभिवादन किया। नगर के बाजारों में भी भक्तों ने आशीर्वाद लेने के लिए डोली के मार्ग का इंतजार किया।

इस भव्य यात्रा के दौरान रात्रि विश्राम महादेव मोहल्ला में हुआ, जहां भक्तों ने रातभर भजन-कीर्तन और पूजा अर्चना की। आगामी 13 जनवरी को कालीमाई की डोली देवप्रयाग पहुंचेगी, और 14 जनवरी को मकर संक्रांति के पवित्र अवसर पर देवी स्नान करेंगी। बद्री-केदार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण ने कहा कि देवरा यात्रा उत्तराखंड की वर्षों पुरानी परंपरा है और इसका प्रत्येक आयोजन नगर और जनपद के धार्मिक जीवन में विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि हर पड़ाव पर देवी के स्वागत और व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर बेहतर तैयारी की जाएगी, ताकि भक्तों का अनुभव और भी सुचारू और सार्थक हो।

 

 

 

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