देव संस्कृति विवि का सातवां दीक्षांत समारोह, उपाधि वितरण और सांस्कृतिक कार्यक्रम से हुआ उत्सव..
उत्तराखंड: बैरागीद्वीप में आयोजित शताब्दी समारोह के अवसर पर देव संस्कृति विश्वविद्यालय (देसंविवि) का सातवां दीक्षांत समारोह भव्य रूप से संपन्न हुआ। समारोह के पहले सत्र में कुल 1379 विद्यार्थियों को डिप्लोमा, स्नातक, परास्नातक और डॉक्टरेट की उपाधियां प्रदान की गईं। दूसरे सत्र में विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक विविधताओं को एक साथ प्रस्तुत करते हुए “एकता में अनेकता” का भाव दिखाई दिया। कार्यक्रम का आयोजन गंगा तट पर किया गया और इसमें आध्यात्मिक संतों, देसंविवि के प्रतिकुलपति, विदेशी विशिष्ट अतिथियों सहित देश-विदेश के गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। दीक्षांत समारोह में जूना अखाड़ा के पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने कहा कि गायत्री परिवार ने दशकों से युग चेतना को जाग्रत करने का ऐतिहासिक कार्य किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह आंदोलन केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग के अधिकार और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने वाला व्यापक सांस्कृतिक अभियान है। उन्होंने महिलाओं को शिक्षा, नेतृत्व और आत्मसम्मान प्रदान करने, छुआछूत जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने तथा समाज में समानता और मानवीय मूल्यों के प्रचार-प्रसार में गायत्री परिवार की भूमिका को भी सराहा।
समारोह के अध्यक्ष प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल बाहरी चुनौतियों से निपटना नहीं है, बल्कि भीतर की सुप्त चेतना को जागृत करना भी है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत प्राप्त करना एक परिवर्तनकारी यात्रा की शुरुआत है, जो चेतना के मार्ग को रूपांतरण के मार्ग में बदल देती है।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समारोह की सराहना भी हुई। हाउस ऑफ लार्ड लंदन के सदस्य लार्ड कृष रावल और लार्ड मेंल्डसन ने देसंविवि की शैक्षणिक और आध्यात्मिक उपलब्धियों की प्रशंसा की। लार्ड मेंल्डसन ने बताया कि लंदन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने सम्पूर्ण गायत्री परिवार को अपनी शुभकामनाएं भेजी हैं। इस अवसर पर शांतिकुंज व्यवस्थापक योगेन्द्र गिरि, स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विजय धस्माना, कई विद्वान और 20 से अधिक देशों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
विश्वविद्यालय के टॉपर विद्यार्थियों को मंच पर सम्मानित किया गया। वर्ष 2023 की श्रेया सिंह, 2024 की शीतल कक्कड़, 2025 की उपासना शर्मा समेत 2022-23 में 29 और 2023-24 में 31 तथा 2024-25 में 29 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान किए गए। इसके अलावा 40 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी गई, जिनमें किरन, सविता, रविन्द्र बालोदिया, आशीष कुमार, प्रज्ञा श्रीवास्तव और अन्य शामिल थे। शोधों के विषयों में हिन्दी, योग विज्ञान एवं मानव चेतना, प्राच्य अध्ययन, इतिहास एवं भारतीय संस्कृति, मनोविज्ञान, भारतीय शास्त्रीय संगीत, शिक्षा शास्त्र, पत्रकारिता और कंप्यूटर विज्ञान शामिल थे। समारोह का समापन विद्यार्थियों को भारत और भारतीय संस्कृति के संरक्षण और प्रचार के संकल्प के साथ विदा करके किया गया। यह दीक्षांत समारोह न केवल शिक्षा की उपलब्धियों का प्रतीक रहा, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को भी समृद्ध करने वाला अनुभव साबित हुआ।
