तकनीकी नवाचार में उत्तराखंड की बड़ी छलांग, पीसीबीडीसी प्रणाली लागू कर बना पहला राज्य..
उत्तराखंड: उत्तराखंड लगातार नवाचार और सुशासन के जरिए देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। समान नागरिक संहिता लागू कर देश में पहली पहल करने के बाद अब उत्तराखंड ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य मत्स्य पालन क्षेत्र में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) का उपयोग करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इस नई पहल के जरिए सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता, सटीकता और तकनीकी मजबूती को नई दिशा मिलने जा रही है। उत्तराखंड मत्स्य विभाग ने भारतीय रिजर्व बैंक और एनपीसीआई के सहयोग से प्रोग्रामेबल सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी सिस्टम (PCBDC) विकसित किया है। इस प्रणाली का शुभारंभ मंगलवार को देहरादून में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान किया गया। कार्यक्रम में मत्स्य विभाग के मंत्री सौरभ बहुगुणा ने मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत इस नई डिजिटल व्यवस्था के साथ-साथ अंतःस्थलीय जल कृषि में अवसंरचना और लाईवस्टॉक बीमा योजना की भी शुरुआत की।
इस अवसर पर वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित मत्स्य पालकों को राहत प्रदान करते हुए लगभग 43 लाख रुपये की मुआवजा राशि वितरित की गई। यह राशि उन किसानों को दी गई है, जिन्हें आपदा के कारण मत्स्य पालन में नुकसान उठाना पड़ा था। प्रोग्रामेबल सीबीडीसी प्रणाली के बारे में जानकारी देते हुए आरबीआई के प्रतिनिधि स्वप्निल कुमार ने कहा कि यह एक सुरक्षित और कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त डिजिटल भुगतान प्रणाली है, जिसे आम नागरिक भी आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए ‘एसबीआई ई-रूपी’ नामक एप्लिकेशन का उपयोग किया जाएगा। इस ऐप के माध्यम से उपभोक्ता अपने बैंक खाते से राशि डिजिटल वॉलेट में स्थानांतरित कर सकते हैं और फिर यूपीआई की तरह ही भुगतान कर सकते हैं।
मत्स्य विभाग की इस योजना की खास बात यह है कि सरकार द्वारा जारी की गई धनराशि का उपयोग केवल उसी उद्देश्य के लिए किया जा सकेगा, जिसके लिए वह जारी की गई है। उदाहरण के तौर पर, ट्राउट प्रोत्साहन योजना के तहत मत्स्य पालकों को मिलने वाला अनुदान केवल सरकार द्वारा इम्पैनल किए गए मर्चेंट्स के यहां ही खर्च किया जा सकेगा। इससे अनुदान राशि के दुरुपयोग पर पूरी तरह रोक लगेगी और योजना का वास्तविक लाभ सीधे पात्र व्यक्ति तक पहुंचेगा। अब तक सरकारी योजनाओं का लाभ डीबीटी के जरिए सीधे बैंक खातों में भेजा जाता रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई और लीकेज पर नियंत्रण लगा। लेकिन सीबीडीसी प्रणाली को लागू कर राज्य सरकार ने एक कदम और आगे बढ़ाया है। इस नई व्यवस्था के तहत योजना की राशि सीधे लाभार्थियों के डिजिटल वॉलेट में तुरंत और बिना किसी देरी के पहुंचेगी।
उत्तराखंड मत्स्य पालन के क्षेत्र में सीबीडीसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद है, जिससे सरकारी योजनाओं की निगरानी भी अधिक प्रभावी हो सकेगी। इसके साथ ही उत्तराखंड ने मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत अवसंरचना और लाईवस्टॉक बीमा योजना शुरू कर एक और नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस बीमा योजना के अंतर्गत बीमा प्रीमियम का 90 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि केवल 10 प्रतिशत राशि मत्स्य पालकों को देनी होगी। यह बीमा प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की स्थिति में मछलियों और संरचनाओं दोनों को कवर करेगा। राज्य सरकार का मानना है कि इस बीमा योजना से मत्स्य पालकों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और वे बिना किसी भय के अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकेंगे। नई डिजिटल भुगतान व्यवस्था और बीमा योजना के माध्यम से उत्तराखंड मत्स्य पालन को आधुनिक, सुरक्षित और लाभकारी बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह पहल न केवल किसानों को सशक्त बनाएगी, बल्कि राज्य को तकनीकी नवाचार में भी देश के अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा करेगी।
