
अक्षय तृतीया से गंगा सप्तमी तक होंगे माँ गंगा के निर्वाण दर्शन..
उत्तराखंड: अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर गंगोत्री धाम के कपाट खुलते ही देश-विदेश से श्रद्धालु मां गंगा के दर्शन के लिए उमड़ पड़े हैं। धाम में विशेष आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है, जहाँ भक्तगण मां गंगा के साक्षात दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस कर रहे हैं। परंपरा के अनुसार अक्षय तृतीया से गंगा सप्तमी तक श्रद्धालु मां गंगा की “निर्वाण पाषाण मूर्ति” के दर्शन करते हैं। यह पावन मूर्ति 19वीं सदी की परंपरा का प्रतीक है, जब गंगोत्री धाम में केवल जलधारा की पूजा की जाती थी। बाद में मां गंगा की मूर्ति की स्थापना कर उनकी शृंगार आराधना की परंपरा शुरू हुई। गंगा सप्तमी के बाद श्रद्धालु मां गंगा के शृंगार रूप के दर्शन कर सकेंगे। यह परिवर्तन न केवल धार्मिक अनुष्ठानों में विविधता लाता है, बल्कि गंगा आराधना की ऐतिहासिक यात्रा को भी दर्शाता है।
गंगोत्री धाम में कपाट खुलते ही सदियों से यह परंपरा चली आ रही है कि गंगा सप्तमी तक मां गंगा के निर्वाण रूप के ही दर्शन होते हैं। परंपरा के अनुसार गंगा सप्तमी को ब्रह्म मुहूर्त से ही उनकी पाषाण मूर्ति की विधिविधान के साथ पूजा शुरू हो जाएगी। उसके बाद गंगा लहरी के पाठ के साथ मां गंगा का विधिवत शृंगार किया जाएगा।
बता दे कि गंगा सप्तमी के दिन मां गंगा का जन्मदिवस माना जाता है। तीर्थ पुरोहित राजेश सेमवाल का कहना हैं कि इसी दिन गंगा पृथ्वी पर आने के लिए शिव की जटाओं से प्रवाहित हुई थी। यह परंपरा 19वीं सदी से लगातार चली आ रही है। क्योंकि इतिहास के अनुसार इससे पहले गंगोत्री धाम में मात्र जलधारा की ही पूजा होती थी।