
UCC संशोधन विधेयक विधानसभा में पेश होगा, विवाह पंजीकरण की समय सीमा एक साल..
उत्तराखंड: उत्तराखंड सरकार आगामी मानसून सत्र 2025 में समान नागरिक संहिता (संशोधन) विधेयक-2025 को सदन में पेश करने जा रही है। यह संशोधन विशेष रूप से विवाह पंजीकरण की समय सीमा को लेकर होगा, जिसमें इसे एक वर्ष तक बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। सरकार ने इस संशोधन को जुलाई 2025 में अध्यादेश के माध्यम से लागू कर दिया था, जिसे अब विधेयक के रूप में विधानसभा से पारित कराया जाएगा। सरकार का कहना है कि विवाह पंजीकरण को लेकर नागरिकों को तकनीकी समस्याओं और समय सीमा की बाध्यता के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में जुलाई में अध्यादेश लाकर इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया गया, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके। आपको बता दे कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां समान नागरिक संहिता (UCC) को कानून के रूप में लागू किया गया है। इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे विषयों को एक समान कानूनी ढांचे में लाया गया है।
उत्तराखंड सरकार ने समान नागरिक संहिता (संशोधन) विधेयक को विधानसभा में पेश करने की कैबिनेट से मंजूरी दे दी है। यह विधेयक जुलाई में लाए गए अध्यादेश को कानून का रूप देने के लिए मानसून सत्र में सदन के पटल पर रखा जाएगा। संशोधित विधेयक में 26 मार्च 2020 से अधिनियम लागू होने की तिथि तक किए गए विवाहों के पंजीकरण की समय सीमा को छह महीने से बढ़ाकर एक वर्ष कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह संशोधन नागरिकों को विवाह पंजीकरण में अधिक समय और कानूनी स्पष्टता देने के लिए लाया जा रहा है। साथ ही कानून का उल्लंघन करने पर जुर्माना लागू कर अनुशासन और जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही समान नागरिक संहिता समिति की ओर से गई संस्तुतियों के आधार पर एक्ट में प्रावधानों के चलते हो रही व्यावहारिक दिक्कतों को भी दूर किया गया है। इसके साथ ही लिपिकीय त्रुटियों जैसे दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के स्थान पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) किया गया है। कई स्थानों पर पैनल्टी को शुल्क लिखा गया है जिन्हें अब पैनल्टी लिखा जाएगा।