गुप्त खाल ट्रेक फतह कर लौटा सीजन का पहला दल, दुर्गम बर्फीले रास्तों को किया पार..
उत्तराखंड: उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र में स्थित देश के सबसे चुनौतीपूर्ण ट्रेकिंग मार्गों में शामिल गुप्त खाल ट्रेक पर इस वर्ष का पहला ट्रेकिंग दल सफलतापूर्वक अपना अभियान पूरा कर सुरक्षित वापस लौट आया है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, ऊंचे हिमालयी दर्रों और बर्फ से ढके रास्तों को पार करते हुए सात सदस्यीय दल ने लगभग दस दिनों की रोमांचक यात्रा पूरी की। करीब 5807 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गुप्त खाल ट्रेक अपने दुर्गम और चुनौतीपूर्ण मार्ग के लिए जाना जाता है। इस रूट को हिमालयी साहसिक अभियानों के सबसे कठिन ट्रेकों में गिना जाता है, जहां मौसम का मिजाज पल-पल बदलता रहता है और कई स्थानों पर बर्फ से ढके रास्ते यात्रियों की परीक्षा लेते हैं।
26 मई को शुरू हुआ था अभियान..
ट्रेकिंग दल ने 26 मई को सीमांत गांव गमशाली से अपनी यात्रा शुरू की थी। अभियान के दौरान ट्रेकर्स ने ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों से गुजरते हुए कई कठिन पड़ावों को पार किया। रास्ते में बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम जैसी चुनौतियों का सामना करने के बावजूद दल ने सफलतापूर्वक निर्धारित रूट पूरा किया और सुरक्षित रूप से ज्योतिर्मठ पहुंच गया। इस विशेष अभियान में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए साहसिक खेलों के शौकीन शामिल थे। दल में दिल्ली, पंजाब, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के ट्रेकर्स ने हिस्सा लिया। सभी प्रतिभागियों ने हिमालय की कठिन परिस्थितियों में ट्रेकिंग का अनुभव प्राप्त किया और उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों की प्राकृतिक सुंदरता को करीब से देखा।
अभियान से जुड़े गाइडों के अनुसार ट्रेक के दौरान दल को कई स्थानों पर बर्फ से ढके रास्तों और ऊंचाई वाले दर्रों को पार करना पड़ा। गमशाली से आगे बढ़ते हुए ट्रेकर्स ने माणा पास क्षेत्र के बर्फीले मार्गों पर लंबी पैदल यात्रा की। ऊंचाई बढ़ने के साथ ऑक्सीजन का स्तर कम होने और मौसम के लगातार बदलने से यात्रा और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई थी। गुप्त खाल ट्रेक उत्तराखंड में एडवेंचर टूरिज्म की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हर वर्ष सीमित संख्या में अनुभवी ट्रेकर्स इस रूट पर अभियान चलाते हैं। दुर्गम भूभाग, ग्लेशियर, बर्फीले पहाड़ और अनछुए प्राकृतिक दृश्य इस ट्रेक को रोमांच प्रेमियों के बीच खास पहचान दिलाते हैं। पर्यटन और साहसिक गतिविधियों से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सफल अभियानों से सीमांत क्षेत्रों में ट्रेकिंग पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। सीजन के पहले दल की सफलता के बाद आने वाले दिनों में अन्य ट्रेकिंग समूहों के भी इस रूट पर पहुंचने की संभावना बढ़ गई है।
