September 9, 2026
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बिना मान्यता मदरसों पर सख्ती, उत्तराखंड में 107 बंद..

हरिद्वार में 102 पर लगा ताला..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में बिना मान्यता संचालित हो रहे मदरसों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई का असर अब सामने आने लगा है। राज्य में अब तक 107 मदरसे बंद हो चुके हैं। इनमें अकेले हरिद्वार जिले के 102 मदरसे शामिल हैं। वहीं कई मदरसों ने संचालन जारी रखने के लिए शिक्षा विभाग से मान्यता की प्रक्रिया शुरू की है। मदरसों की स्थिति को लेकर जिलों से मिल रही रिपोर्ट के अनुसार हरिद्वार में बंद हुए मदरसों की संख्या सबसे अधिक है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को भेजी गई जानकारी में जिले की मौजूदा स्थिति स्पष्ट की गई है।

हरिद्वार में 76 मदरसों ने मान्यता के लिए किया आवेदन

हरिद्वार जिले में 102 मदरसे बंद होने की जानकारी सामने आई है। वहीं 76 मदरसों ने शिक्षा विभाग से मान्यता लेने के लिए आवेदन किया है। इन आवेदनों पर फिलहाल प्रक्रिया चल रही है। जिले में 45 मदरसे शिक्षा विभाग में पंजीकृत बताए गए हैं, जबकि 46 मदरसों का निरीक्षण अभी बाकी है। निरीक्षण के बाद इन संस्थानों की स्थिति को लेकर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अनुसार ऊधमसिंह नगर में कुल 119 मदरसे हैं। इनमें से अब तक 5 बंद हो चुके हैं। वहीं 60 मदरसों ने अभी तक शिक्षा विभाग में मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया है। नैनीताल जिले में कुल 18 मदरसों की जानकारी सामने आई है। इनमें से 12 मदरसों ने मान्यता के लिए आवेदन किया है। पिथौरागढ़ में एक और चंपावत में दो मदरसे संचालित होने की जानकारी है। इन दोनों जिलों से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट अभी राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को प्राप्त नहीं हुई है।

मदरसा बोर्ड से पहले इतने संस्थान थे पंजीकृत

मदरसा बोर्ड समाप्त होने से पहले अलग-अलग जिलों में बड़ी संख्या में मदरसे बोर्ड से विभिन्न स्तरों की मान्यता लेकर संचालित हो रहे थे। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक देहरादून में 41, नैनीताल में 18, अल्मोड़ा में 1, पिथौरागढ़ में 1, हरिद्वार में 270, ऊधमसिंह नगर में 119 और चंपावत में 2 मदरसे पंजीकृत थे। इन संस्थानों को तहतानिया, फौकानिया, मुंशी-मौलवी, आलिम तथा अरबी-फारसी जैसी श्रेणियों में मान्यता मिली थी। इसके अलावा भी प्रदेश में कई मदरसे संचालित होने की जानकारी थी, लेकिन मदरसा बोर्ड में पंजीकरण नहीं होने के कारण ऐसे संस्थानों का पूरा आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। सरकार के निर्देशों के बाद प्रशासन की ओर से मदरसों की मान्यता और संचालन की स्थिति की जांच के लिए अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि बिना मान्यता संचालित संस्थानों को नियमों के दायरे में लाना इस प्रक्रिया का प्रमुख उद्देश्य है। अधिकारियों के मुताबिक जांच और सत्यापन की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। जिलों से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर मदरसों की स्थिति का विस्तृत आकलन किया जाएगा और नियमानुसार आगे की कार्रवाई होगी।

 

 

 

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