सौर स्वरोजगार योजना का दूसरा चरण, बैटरी एनर्जी स्टोरेज पर होगा फोकस..
उत्तराखंड: उत्तराखंड सरकार की मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना अब और अधिक प्रभावी रूप में लागू की जा रही है। योजना के तहत सोलर प्लांट लगाने वाले लाभार्थी अगले 25 वर्षों तक उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) को उत्पादन की गई बिजली भेज सकते हैं। योजना के प्रारंभिक चरण में 10,000 युवाओं को 20 से 25 किलोवाट तक के सौर परियोजनाएं आवंटित की गई थीं। हालांकि, योजना के प्रति लोगों में अपेक्षित उत्साह कम होने के कारण साल 2023 में इसमें संशोधन किया गया। संशोधन के तहत लाभार्थियों को अब 20 से 200 किलोवाट तक के सोलर प्लांट लगाने की सुविधा दी गई है। साथ ही इस योजना की समय सीमा को 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है। इसका उद्देश्य मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत 250 मेगावाट के सोलर प्लांट स्थापित करने के लक्ष्य को पूरा करना है। योजना से न केवल युवाओं को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे, बल्कि राज्य में स्वच्छ और सतत ऊर्जा के उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे प्रदेश में हरित ऊर्जा का प्रसार होगा और युवाओं के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी विकल्प सृजित होंगे।
इस दिशा में राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि 31 मार्च 2026 तक यदि कोई लाभार्थी आवंटित सोलर प्लांट नहीं लगाता है, तो उसका प्लांट वेटिंग लिस्ट के अगले योग्य लाभार्थियों को आवंटित कर दिया जाएगा। इस परिप्रेक्ष्य में ऊर्जा विभाग योजना के दूसरे चरण के प्रस्ताव को अंतिम रूप दे रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार संभावना है कि दिसंबर 2025 के अंत तक यह प्रस्ताव तैयार हो जाएगा। इस बार योजना में खास फोकस बैटरी एनर्जी स्टोरेज (BESS) की सुविधा पर रखा गया है, जो सौर ऊर्जा उत्पादन और भंडारण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि बैटरी एनर्जी स्टोरेज की सुविधा से न केवल सौर ऊर्जा का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होगा, बल्कि राज्य में सतत और हरित ऊर्जा उत्पादन को भी मजबूती मिलेगी। इससे युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य में स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
उत्तराखंड में मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के पहले चरण के तहत 250 मेगावाट का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। योजना के तहत कुल 250 मेगावाट का आवंटन भी किया जा चुका है। इसमें से 180 मेगावाट का सोलर प्लांट स्थापित हो चुका है, जबकि 20 मेगावाट सोलर प्लांट वर्तमान में सक्रिय है। हालांकि कई ऐसे लाभार्थी हैं, जिन्हें सोलर प्लांट आवंटित किए गए हैं, लेकिन वे इसे स्थापित या संचालित नहीं कर पा रहे हैं। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि आवंटित लाभार्थी समय सीमा के भीतर अपना सोलर प्लांट नहीं लगाते हैं, तो उनका प्लांट वेटिंग लिस्ट में शामिल अन्य योग्य लाभार्थियों को आवंटित कर दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से योजना के लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करना सुनिश्चित होगा और राज्य में सौर ऊर्जा उत्पादन के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
उत्तराखंड में मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के दूसरे चरण की तैयारियां तेज़ी से चल रही हैं। प्रमुख सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि इस योजना के संबंध में कई दौर की बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। योजना के कंसल्टेंट में सीईई डब्ल्यू, उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL), उरेडा और विद्युत नियामक आयोग शामिल हैं, जिनके साथ विचार-विमर्श भी किया गया है। बैठकों में यह विचार सामने आया कि योजना के दूसरे चरण में बैटरी एनर्जी स्टोरेज (BESS) को भी शामिल किया जाना चाहिए। इस दिशा में काम पहले ही शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार दिसंबर महीने के अंत तक विभागीय स्तर पर इस योजना को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। इसके बाद इसे मंत्रिमंडल के सामने पेश किया जाएगा। ऊर्जा सचिव ने कहा कि इस कदम से न केवल सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि युवाओं को स्वरोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे और राज्य में हरित ऊर्जा के विस्तार को मजबूती मिलेगी।
