सिंचाई क्षेत्र में बड़ा लक्ष्य, अगले पांच साल में प्रदेश की सिंचित भूमि दोगुनी, CS ने दिए निर्देश..
उत्तराखंड: प्रदेश में विकास कार्यों को गति देने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने बुधवार को सचिवालय में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में पूंजीगत व्यय, केंद्र प्रायोजित योजनाएं (CSS), बाह्य सहायतित परियोजनाएं (EAP), नाबार्ड, SASCI, SNA स्पर्श तथा विभिन्न विभागों की व्यय योजनाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि पूंजीगत व्यय, CSS, EAP और नाबार्ड पोषित योजनाओं से जुड़े प्रस्ताव समयबद्ध तरीके से शासन को भेजे जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही उन्होंने रिइम्बर्समेंट दावों को भी समय पर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, ताकि वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता में कोई बाधा न आए।
बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि जो विभाग बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं और योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर रहे हैं, उन्हें और अधिक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए। उन्होंने सभी परियोजनाओं के लिए स्पष्ट टाइमलाइन तय करते हुए उनकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने पर जोर दिया। मुख्य सचिव ने वित्त एवं नियोजन विभाग को कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत स्वतंत्र थर्ड पार्टी मूल्यांकन (Independent Third Party Evaluation) मैकेनिज्म तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां भी लापरवाही सामने आए, वहां जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। जिन परियोजनाओं में थर्ड पार्टी मूल्यांकन का प्रावधान नहीं है, वहां तत्काल इसे शामिल करने के निर्देश भी दिए गए।
पांच साल में दोगुनी होगी प्रदेश की सिंचित भूमि..
बैठक में सिंचाई विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की वर्तमान में लगभग 15 प्रतिशत सिंचित भूमि को अगले पांच वर्षों में बढ़ाकर 30 प्रतिशत किया जाए। इसके लिए नए बैराज, नहरों और सिंचाई परियोजनाओं पर काम करने के निर्देश दिए गए।उन्होंने पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लगाए गए स्प्रिंकलर सिस्टम को प्रदेशभर में लागू करने पर भी जोर दिया। साथ ही लघु सिंचाई योजनाओं के तहत बेहतर और गुणवत्तापूर्ण प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए, ताकि किसानों को अधिकतम लाभ मिल सके।
पेयजल योजनाओं को जीरो कार्बन की ओर ले जाने पर जोर..
मुख्य सचिव ने जल संस्थान और जल निगम को पेयजल योजनाओं को जीरो कार्बन उत्सर्जन की दिशा में आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने सोलर प्लांट को बैटरी सिस्टम से जोड़ने और इसके लिए क्लाइमेट चेंज फंड के उपयोग पर भी विचार करने को कहा। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा को किस प्रकार परियोजनाओं में मुख्य ऊर्जा स्रोत के रूप में अपनाया जा सकता है, इस दिशा में ठोस प्रस्ताव तैयार किए जाएं। इसके साथ ही पेयजल विभाग को सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की 24×7 रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए प्रभावी मैकेनिज्म विकसित करने के निर्देश दिए।
सरकारी कॉलोनियों में वाटर मीटर अनिवार्य..
मुख्य सचिव ने जल संस्थान को 31 मार्च तक देहरादून की सभी सरकारी कॉलोनियों में शत प्रतिशत वाटर मीटर लगाने का लक्ष्य दिया। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश के सभी नगर निगम क्षेत्रों में भी शत प्रतिशत वाटर मीटरिंग लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे पानी की बर्बादी पर प्रभावी रोक लगेगी और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। पानी की गुणवत्ता को लेकर भी उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि दूषित पानी की शिकायत मिलने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्य सचिव ने सौंग बांध परियोजना के अंतर्गत पेयजल घटक की डीपीआर एक सप्ताह के भीतर शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही STP से निकलने वाले उपचारित जल को नॉन-ड्रिंकिंग उद्देश्यों में उपयोग करने पर भी बल दिया।
बड़े शहरों में पार्क और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा..
शहरी विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हुए मुख्य सचिव ने देहरादून सहित प्रदेश के अन्य बड़े शहरों में बड़े पार्क विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने टिहरी को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए शीघ्र कार्ययोजना तैयार करने को कहा।इसके साथ ही टिहरी झील रिंग रोड परियोजना को जल्द शुरू करने और पर्यटन विभाग को टिहरी, ऋषिकेश एवं चम्पावत में पर्यटन क्षेत्र के विकास से जुड़े प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने वन विभाग को सिटी ग्रीनिंग, एक्सप्रेस-वे के किनारे हरित विकास और बायो-फेंसिंग से जुड़े मॉडल प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा। वहीं आईटी विभाग को साइंस सिटी और विज्ञान केंद्रों की स्थापना के साथ-साथ उनके संचालन और मेंटरिंग के लिए प्रभावी मैकेनिज्म विकसित करने के निर्देश दिए। बैठक के अंत में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सभी विभागों से आपसी समन्वय के साथ योजनाओं को धरातल पर उतारने का आह्वान किया और कहा कि विकास कार्यों की गुणवत्ता, समयबद्धता और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
