पिथौरागढ़ में रात का आकाश बना पर्यटन स्थल, स्टारगेज़िंग के लिए राज्य का नया हब..

पिथौरागढ़ में रात का आकाश बना पर्यटन स्थल, स्टारगेज़िंग के लिए राज्य का नया हब..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड के शांत और सुरम्य पर्वतीय जिले पिथौरागढ़ को अब आधिकारिक रूप से एस्ट्रो-टूरिज्म का नया केंद्र माना जाने लगा है। जिले में पहली बार समर्पित एस्ट्रो-टूरिज्म ऑब्ज़र्वेटरी की शुरुआत की गई है, जो हिमालयी आसमान की अद्भुत छटा को देखने के लिए पर्यटकों को आकर्षित करेगी। इस पहल को जिला पर्यटन विभाग द्वारा विकसित किया गया है, जबकि इसका क्रियान्वयन Starscapes Experiences Pvt Ltd ने किया है। उद्घाटन समारोह में उत्तराखंड सरकार के मंत्री सतपाल महाराज ने ऑब्ज़र्वेटरी का फीता काटकर इसका शुभारंभ किया।

पिथौरागढ़ प्राकृतिक रूप से डार्क स्काई ज़ोन के लिए आदर्श माना जाता है। यहां की ऊंचाई, न्यूनतम प्रकाश प्रदूषण और स्वच्छ खुला आकाश इसे तारों, ग्रहों और खगोलीय घटनाओं का अवलोकन करने के लिए परफेक्ट बनाते हैं। शहरों में जहां रात का आकाश रोशनी से ढका रहता है, वहीं पिथौरागढ़ में पर्यटक अब नग्न आंखों और टेलीस्कोप के जरिए ब्रह्मांड का अद्भुत नज़ारा देख सकेंगे। नई ऑब्ज़र्वेटरी में पर्यटकों के लिए गाइडेड नाइट-स्काई ऑब्ज़र्वेशन, टेलीस्कोप के माध्यम से ग्रहों और तारामंडलों का अवलोकन, खगोल विज्ञान पर शैक्षणिक सत्र और बच्चों व युवाओं के लिए एस्ट्रोनॉमी वर्कशॉप जैसी गतिविधियां उपलब्ध कराई जाएंगी। यह पहल न सिर्फ मनोरंजन बल्कि विज्ञान आधारित पर्यटन और शिक्षा को भी बढ़ावा देगी।

इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत है स्थानीय समुदाय की भागीदारी। पिथौरागढ़ के निवासियों को एस्ट्रो गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया गया है और उन्हें टेलीस्कोप संचालन, तारामंडल पहचान और खगोल विज्ञान की मूल जानकारी दी गई है। इससे युवाओं को नए रोजगार के अवसर मिले हैं और पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ा गया है। पर्यटन विभाग के अनुसार भविष्य में उत्तराखंड के अन्य पर्वतीय जिलों में भी इसी तरह की एस्ट्रो-टूरिज्म ऑब्ज़र्वेटरी विकसित करने की योजना है।

पिथौरागढ़ अब केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए नहीं बल्कि रात के तारों भरे आसमान के लिए भी जाना जाएगा। इस ऑब्ज़र्वेटरी के साथ यह जिला उत्तराखंड का पहला ऐसा स्थल बन गया है, जहां रात का आकाश खुद एक पर्यटन स्थल बन चुका है। उत्तराखंड सरकार की इस पहल को अनुभव आधारित पर्यटन, पर्यावरण-संवेदनशील विकास और विज्ञान व प्रकृति के संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हिमालय की गोद में बसा पिथौरागढ़ अब सितारों की चमक और खगोल विज्ञान के अनुभव के लिए देशभर के पर्यटकों को आकर्षित करेगा।

 

 

 

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