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नई बिजली दरों को लेकर 18 फरवरी से जनसुनवाई, नियामक आयोग ने जारी किया कार्यक्रम..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में इस वर्ष प्रस्तावित नई बिजली दरों को लेकर प्रक्रिया तेज हो गई है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग 18 फरवरी से जनसुनवाई की शुरुआत करने जा रहा है। शुक्रवार को आयोग की ओर से जनसुनवाई का विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। इस बार भी बिजली दरों को लेकर गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के प्रमुख शहरों में आम जनता और उपभोक्ताओं की राय सुनी जाएगी। ऊर्जा निगमों की ओर से इस वर्ष कुल मिलाकर औसतन 18.50 प्रतिशत तक बिजली दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव नियामक आयोग के समक्ष रखा गया है। इसमें उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने 16.23 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव दिया है, जबकि पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) ने करीब तीन प्रतिशत बढ़ोतरी की मांग की है। वहीं, इस बार उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) ने पहली बार राहत देने वाला प्रस्ताव पेश करते हुए अपना टैरिफ माइनस 1.2 प्रतिशत रखा है।

पिछले वर्ष जनसुनवाई गढ़वाल मंडल में देहरादून और गोपेश्वर, जबकि कुमाऊं मंडल में रुद्रपुर और लोहाघाट में आयोजित की गई थी। इस बार आयोग ने स्थानों में बदलाव करते हुए गढ़वाल मंडल में देहरादून के साथ कर्णप्रयाग और कुमाऊं मंडल में रुद्रपुर के साथ मुनस्यारी को जनसुनवाई के लिए चुना है। इन स्थानों पर आयोजित होने वाली सुनवाई में घरेलू, व्यावसायिक, औद्योगिक और कृषि श्रेणी के सभी बिजली उपभोक्ता भाग ले सकेंगे। आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि जनसुनवाई के दौरान कोई भी उपभोक्ता बिजली दरों को लेकर अपने सुझाव, आपत्ति या तर्क सीधे नियामक आयोग के समक्ष रख सकता है। उपभोक्ताओं की ओर से दी गई राय को अंतिम निर्णय में महत्वपूर्ण आधार माना जाएगा। जनसुनवाई में उपभोक्ता संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और औद्योगिक प्रतिनिधियों की भागीदारी भी अपेक्षित है।

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के सचिव नीरज ने कहा कि जनसुनवाई पूरी होने के बाद आयोग तीनों ऊर्जा निगमों के प्रस्तावों, उपभोक्ताओं की आपत्तियों और वित्तीय तथ्यों का गहन अध्ययन करेगा। सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही नई बिजली दरों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। आयोग का प्रयास रहेगा कि उपभोक्ताओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े और साथ ही ऊर्जा निगमों की वित्तीय स्थिति भी संतुलित बनी रहे। नियामक आयोग के अनुसार, जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संशोधित या स्वीकृत नई बिजली दरें एक अप्रैल से लागू की जाएंगी। ऐसे में आने वाले दिनों में बिजली दरों को लेकर प्रदेशभर में चर्चा और बहस तेज होने की संभावना है। उपभोक्ताओं की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आयोग प्रस्तावित बढ़ोतरी को किस हद तक स्वीकार करता है और आम जनता को कितनी राहत मिल पाती है।

 

 

 

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