बजट से पहले तेज हुई तैयारी, नए कार्यों की स्वीकृति पर सीएस ने दिए सख्त निर्देश..
उत्तराखंड: आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रस्तावित विकास कार्यों को समय पर धरातल पर उतारने के लिए प्रदेश सरकार ने स्वीकृति प्रक्रिया को लेकर सख्त रुख अपना लिया है। शासन स्तर पर यह स्पष्ट कर दिया गया है कि अगले वित्तीय वर्ष में शुरू होने वाले सभी नए कार्यों के लिए प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृतियां हर हाल में 15 फरवरी तक प्राप्त करनी होंगी। इसका मकसद बजट जारी होते ही योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी तरह की देरी को रोकना है। इसी क्रम में सोमवार को सचिवालय में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिव समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने अधिकारियों को साफ शब्दों में निर्देश दिए कि विकास कार्यों में देरी और प्रक्रियात्मक ढिलाई अब स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि योजनाएं कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि समय पर जमीन पर दिखाई दें।
मुख्य सचिव ने कहा कि अक्सर यह देखने में आता है कि बजट पारित होने के बावजूद कई योजनाएं महीनों तक शुरू नहीं हो पातीं। इसका प्रमुख कारण प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृतियों में होने वाली देरी होती है, जिसका सीधा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ता है। इसी समस्या को खत्म करने के लिए यह निर्णय लिया गया है कि सभी विभाग अगले वित्तीय वर्ष के नए कार्यों के प्रस्ताव पहले से तैयार रखें और तय समय सीमा के भीतर स्वीकृति प्रक्रिया पूरी करें।उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रस्तावित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित किया जाए और 15 फरवरी से पहले सभी जरूरी अनुमोदन प्राप्त कर लिए जाएं। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि यह समय सीमा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि शासन की कार्य संस्कृति में बदलाव का संकेत है।
समय पर स्वीकृतियां मिलने से न केवल योजनाओं की शुरुआत जल्दी हो सकेगी, बल्कि टेंडर प्रक्रिया, एजेंसी चयन और फील्ड स्तर पर कार्य भी वित्तीय वर्ष के शुरुआती चरण में ही शुरू किए जा सकेंगे। इससे बजट का बेहतर और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होगा और बाद में होने वाली जल्दबाजी से भी बचा जा सकेगा। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने विभागीय कामकाज को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए एक और अहम निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग अपने कार्यों और योजनाओं को लेकर एक विस्तृत वार्षिक कैलेंडर तैयार करे। इस कैलेंडर में यह स्पष्ट किया जाए कि किस महीने या चरण में कौन-सा कार्य किया जाना है और उसकी जिम्मेदारी किस अधिकारी या इकाई की होगी। शासन का मानना है कि वार्षिक कैलेंडर आधारित कार्यप्रणाली से विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि कहां और किस स्तर पर देरी हो रही है। इससे समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे।
बैठक में यह मुद्दा भी सामने आया कि कई बार योजनाएं शुरू तो कर दी जाती हैं, लेकिन उनके लिए स्पष्ट समय सीमा और माइलस्टोन तय नहीं किए जाते, जिसके कारण कार्य लंबे समय तक अधूरे पड़े रहते हैं। इस पर मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि वार्षिक कैलेंडर में प्रत्येक योजना के लिए चरणबद्ध लक्ष्य और स्पष्ट समय सीमा तय की जाए। साथ ही इन लक्ष्यों की नियमित समीक्षा भी अनिवार्य रूप से की जाए। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नई योजनाओं की घोषणा करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ तय समय में जनता तक पहुंचे। इसके लिए विभागों में समयबद्धता, अनुशासन और जवाबदेही बेहद जरूरी है। उन्होंने सभी सचिवों से अपेक्षा जताई कि इन निर्देशों को गंभीरता से लेते हुए अपने-अपने विभागों में सख्ती से लागू कराया जाए। सचिव समिति की बैठक में लिए गए ये फैसले इस बात के संकेत हैं कि राज्य सरकार अब विकास कार्यों के क्रियान्वयन को लेकर अधिक गंभीर, योजनाबद्ध और परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण अपना रही है। समय पर स्वीकृतियों और वार्षिक कैलेंडर के माध्यम से काम करने की व्यवस्था से यह उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले वित्तीय वर्ष में विकास कार्यों की रफ्तार तेज होगी और योजनाएं वास्तविक रूप से धरातल पर नजर आएंगी।
