उत्तराखंड में रोजगार की जरूरत के मुताबिक होगी युवाओं की ट्रेनिंग.. - newenergystate
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उत्तराखंड में रोजगार की जरूरत के मुताबिक होगी युवाओं की ट्रेनिंग..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने और कौशल विकास कार्यक्रमों को उद्योगों की जरूरतों से जोड़ने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार अब ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर जोर दे रही है, जिनसे युवाओं को पढ़ाई और ट्रेनिंग पूरी करने के बाद नौकरी पाने में आसानी हो। इसके लिए प्रदेश के सभी जिलों में रोजगार की संभावनाओं, उपलब्ध प्रशिक्षण सुविधाओं और उद्योगों की मांग का आकलन कर जिला स्तरीय कौशल विकास योजनाएं तैयार की जाएंगी। इस संबंध में शुक्रवार को सचिवालय में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। इसमें कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग के अधिकारियों के साथ उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। बैठक में युवाओं को रोजगार के योग्य बनाने, प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुधारने और कंपनियों की जरूरत के अनुसार कुशल कार्यबल तैयार करने पर चर्चा की गई।

सभी जिलों के लिए तैयार होगा कौशल विकास प्लान
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी जिलों के डिस्ट्रिक्ट स्किल डेवलपमेंट प्लान (DSDP) जल्द तैयार कर संबंधित पोर्टल पर अपलोड किए जाएं। इन योजनाओं में प्रत्येक जिले की रोजगार संबंधी जरूरतों, स्थानीय उद्योगों, उपलब्ध प्रशिक्षण संस्थानों और मांग वाले कौशल का विस्तृत आकलन शामिल किया जाएगा। योजना तैयार करते समय यह भी देखा जाएगा कि किन क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं अधिक हैं और वहां के युवाओं को संबंधित काम के लिए जरूरी प्रशिक्षण मिल रहा है या नहीं। यदि किसी क्षेत्र में नौकरियां उपलब्ध हैं, लेकिन युवाओं को उस काम से जुड़ी ट्रेनिंग नहीं मिल पा रही है, तो वहां नए प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य जिलों की स्थानीय जरूरतों के अनुसार कौशल विकास कार्यक्रम तैयार करना है, ताकि युवाओं को अपने आसपास के क्षेत्रों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों का लाभ मिल सके।

कंपनियों की जरूरत के हिसाब से तैयार होंगे युवा
बैठक में उद्योगों की मांग और प्रशिक्षण संस्थानों में दिए जा रहे कौशल के बीच अंतर को दूर करने पर विशेष जोर दिया गया। अक्सर कंपनियों को ऐसे कर्मचारियों की जरूरत होती है, जिन्हें किसी विशेष तकनीक या काम का व्यावहारिक ज्ञान हो। वहीं, प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं के पास कई बार उद्योगों की अपेक्षाओं के अनुरूप कौशल नहीं होता। मुख्य सचिव ने इस अंतर को कम करने के लिए रोजगार की संभावनाओं और प्रशिक्षण के लक्ष्यों का आकलन करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही नई तकनीकों और तेजी से उभर रहे क्षेत्रों में जरूरी कौशल विकसित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। इस काम में सेतु आयोग की अध्ययन रिपोर्ट का उपयोग करने की बात कही गई है, ताकि भविष्य में रोजगार के बदलते स्वरूप और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जा सकें।

प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर होगी निगरानी
कौशल विकास योजनाओं को प्रभावी बनाने के लिए केवल नए पाठ्यक्रम शुरू करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्य सचिव ने भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) और प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए। बैठक में प्रदेश के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए समान गुणवत्ता मानक तय करने पर भी जोर दिया गया। इसके तहत प्रशिक्षण केंद्रों में पढ़ाई और व्यावहारिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता बेहतर बनाने के साथ यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा कि युवाओं को उद्योगों में काम करने के लिए जरूरी दक्षताएं हासिल हों। प्रशिक्षण व्यवस्था की नियमित समीक्षा के लिए असेसमेंट और थर्ड पार्टी ऑडिट कराने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है। इससे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने और कमियों को दूर करने में मदद मिल सकती है।

मुख्य सचिव ने कहा कि कौशल विकास योजनाओं का उद्देश्य युवाओं को केवल प्रशिक्षण प्रमाणपत्र देना नहीं होना चाहिए। जरूरी है कि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद युवा संबंधित क्षेत्र में काम करने के योग्य बनें और उन्हें रोजगार के अवसर मिल सकें। बैठक में कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग के सचिव सी. रविशंकर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें संजय अग्रवाल, गौरव लांबा और डॉ. सचिन शर्मा समेत विभिन्न संस्थानों से जुड़े प्रतिनिधि शामिल रहे। प्रदेश में जिला स्तर पर कौशल विकास योजनाओं को मजबूत करने, उद्योगों के साथ सहयोग बढ़ाने और प्रशिक्षण की गुणवत्ता की निगरानी से जुड़ी यह पहल युवाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब इन योजनाओं को तैयार करने और लागू करने की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

 

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