पैराग्लाइडिंग को करियर बनाने का मौका..
प्रशिक्षण से लेकर उपकरण खरीदने तक युवाओं को मिलेगा सहारा..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार पैराग्लाइडिंग प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके युवाओं को व्यावसायिक पायलट बनने और अपना काम शुरू करने में मदद देने की दिशा में कदम उठा रही है। इसके तहत युवाओं को जरूरी उड़ान अभ्यास कराने के साथ पैराग्लाइडिंग उपकरण खरीदने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की योजना पर काम किया जा रहा है। पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल के अनुसार, प्रदेश में अब तक 141 युवाओं को पैराग्लाइडिंग का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि ये युवा निर्धारित मानकों को पूरा कर व्यावसायिक टेंडम पायलट बन सकें और पर्यटन के क्षेत्र में अपनी आजीविका शुरू कर सकें।
व्यावसायिक पायलट बनने के लिए जरूरी है उड़ान अभ्यास
पैराग्लाइडिंग का प्रशिक्षण लेने के बाद व्यावसायिक टेंडम पायलट बनने के लिए युवाओं को कई चरणों से गुजरना पड़ता है। इसमें P1, P2 और SIV जैसे प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के साथ कम से कम 100 घंटे का उड़ान अभ्यास महत्वपूर्ण है। इसके अलावा निर्धारित मानकों के अनुसार 35 किलोमीटर की क्रॉस-कंट्री उड़ान पूरी करना भी जरूरी है। इन प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद ही युवा व्यावसायिक टेंडम पायलट लाइसेंस के लिए पात्र बन सकेंगे। पहले उड़ान अभ्यास के लिए पर्याप्त अवसर नहीं मिलने से कई युवाओं को आगे बढ़ने में परेशानी होती थी। इसी चुनौती को दूर करने के लिए सरकार अब प्रशिक्षण के साथ व्यावहारिक अनुभव पर भी ध्यान दे रही है।
बिलखेत में 17 युवा कर रहे उड़ान का अभ्यास
पौड़ी गढ़वाल के बिलखेत में 1 से 30 अक्टूबर 2026 तक विशेष पैराग्लाइडिंग उड़ान अभ्यास अभियान चलाया जा रहा है। इसमें 17 प्रशिक्षित युवा हिस्सा ले रहे हैं। अभियान के दौरान युवाओं को टेंडम फ्लाइंग का व्यावहारिक अनुभव देने और उनके जरूरी उड़ान घंटे पूरे कराने पर जोर दिया जा रहा है। पर्यटन सचिव के अनुसार इस पहल के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और कई युवा अपने 100 फ्लाइंग आवर्स पूरे कर चुके हैं। अक्टूबर में बिलखेत का अभियान पूरा होने के बाद नवंबर में चंपावत जिले में भी उड़ान अभ्यास जारी रखने की योजना है। पैराग्लाइडिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत चंपावत से हुई थी। इसके बाद इसे पौड़ी गढ़वाल तक विस्तार दिया गया। अब अलग-अलग स्थानों पर अभ्यास के अवसर उपलब्ध कराकर युवाओं को व्यावसायिक स्तर की तैयारी में मदद दी जा रही है।
उपकरण खरीदने के लिए मिलेगी आर्थिक सहायता
पैराग्लाइडिंग में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के सामने प्रशिक्षण के बाद सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक महंगे उपकरण खरीदने के लिए पूंजी जुटाना है। सरकार इस बाधा को कम करने के लिए प्रशिक्षित युवाओं को वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना से जोड़ने की तैयारी कर रही है। इस योजना के माध्यम से पात्र युवाओं को पैराग्लाइडिंग के जरूरी उपकरण खरीदने के लिए सब्सिडी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। हालांकि, आर्थिक सहायता की राशि और पात्रता से जुड़ी शर्तें योजना के लागू प्रावधानों के अनुसार तय होंगी। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को केवल प्रशिक्षण तक सीमित न रखकर उन्हें लाइसेंस हासिल करने और अपना रोजगार शुरू करने तक सहयोग देना है। निर्धारित उड़ान घंटे, प्रशिक्षण और लाइसेंस संबंधी शर्तें पूरी करने वाले युवाओं को स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकेगा।
साहसिक पर्यटन से पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां और प्राकृतिक सुंदरता साहसिक पर्यटन के लिए अनुकूल मानी जाती हैं। पैराग्लाइडिंग जैसी गतिविधियों का विस्तार होने से पर्यटकों को नए अनुभव मिल सकते हैं। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी विकसित हो सकते हैं। इसका लाभ केवल पैराग्लाइडिंग संचालकों तक सीमित नहीं रहेगा। पर्यटन गतिविधियां बढ़ने से होटल, होमस्टे, परिवहन और अन्य स्थानीय सेवाओं से जुड़े कारोबार को भी फायदा मिलने की संभावना है। प्रशिक्षित युवा लाइसेंस और अन्य जरूरी मानक पूरे करने के बाद तकनीकी समिति द्वारा चयनित स्थलों पर पैराग्लाइडिंग गतिविधियां संचालित कर सकेंगे। अब इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने युवा निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी कर व्यावसायिक पायलट बन पाते हैं और स्वरोजगार योजना के तहत उन्हें किस स्तर तक आर्थिक सहयोग मिलता है।
