उत्तराखंड चुनाव से पहले भाजपा का जनजातीय कार्ड..
जनजाति गौरव सप्ताह की तैयारी तेज..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में भाजपा प्रदेश मुख्यालय में अनुसूचित जनजाति मोर्चा की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनजातीय समुदायों के बीच संपर्क बढ़ाने और भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा पर चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता लोकसभा सांसद एवं भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मन्नालाल रावत ने की। इसमें प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट समेत प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए।
11 से 18 नवंबर तक मनाया जाएगा जनजाति गौरव सप्ताह
बैठक के बाद डॉ. मन्नालाल रावत ने बताया कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में 11 से 18 नवंबर तक जनजाति गौरव सप्ताह मनाने की योजना बनाई गई है। इस दौरान जनजातीय समाज के इतिहास, संस्कृति और योगदान को रेखांकित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रमों में जनजातीय स्मारकों की साफ-सफाई, दीपोत्सव और युवाओं के साथ संवाद जैसे आयोजन शामिल होंगे। इनके माध्यम से जनजातीय नायकों की विरासत को सामने लाने और नई पीढ़ी को उनके योगदान से परिचित कराने पर जोर रहेगा।
जनजातीय क्षेत्रों के विकास को लेकर भाजपा ने गिनाईं उपलब्धियां
डॉ. रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय क्षेत्रों के विकास और वहां बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कई पहल की गई हैं। उन्होंने कहा कि पहले दूरदराज के गांवों को देश के अंतिम गांव के रूप में देखा जाता था, जबकि मौजूदा सरकार उन्हें विकास की दृष्टि से पहले गांव के तौर पर पहचान देने पर जोर दे रही है। उन्होंने वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम और जनजाति गौरव दिवस जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके जरिए सीमावर्ती और जनजातीय क्षेत्रों के विकास के साथ स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया गया है।
संगठन और जनजातीय समाज के बीच संवाद पर जोर
बैठक में जनजातीय समुदायों तक पहुंच बढ़ाने और उनके बीच पार्टी की गतिविधियों को मजबूत करने से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। डॉ. रावत ने नक्सलवाद और अलगाववाद जैसी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए इनके खिलाफ सरकार की कार्रवाई को अपनी पार्टी की उपलब्धि बताया। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा की इस बैठक को संगठनात्मक तैयारियों और जनजातीय समुदायों के बीच संपर्क मजबूत करने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। जनजाति गौरव सप्ताह के कार्यक्रमों के जरिए पार्टी जनजातीय इतिहास, संस्कृति और विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देने की तैयारी में है।
