पिथौरागढ़ जेल में कैदियों के भोजन का हिसाब देना होगा..
सूचना आयोग ने दिया 7 दिन का समय
उत्तराखंड: जिला कारागार में बंद कैदियों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और उस पर खर्च होने वाली सरकारी धनराशि से जुड़ी जानकारी अब सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत उपलब्ध करानी होगी। राज्य सूचना आयोग ने इस मामले में सख्ती दिखाते हुए जेल प्रशासन को सात दिन के भीतर मांगी गई सभी जानकारियां उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई राज्य सूचना आयुक्त कुशला नंद कोठियाल के समक्ष हुई। शिकायतकर्ता किशोर राम ने पिथौरागढ़ जिला कारागार से कैदियों के भोजन की व्यवस्था और उससे संबंधित खर्च का विवरण मांगा था। इसमें भोजन की गुणवत्ता की निगरानी के लिए गठित समिति की बैठकों का ब्योरा भी शामिल था।
भोजन के बजट और खर्च का मांगा हिसाब
आरटीआई आवेदन के माध्यम से किशोर राम ने जानना चाहा था कि जेल में कैदियों के भोजन के लिए कितना बजट आवंटित किया गया और उसमें से अब तक कितनी धनराशि खर्च हुई है। इसके साथ ही भोजन की गुणवत्ता की जांच करने वाली समिति की कार्यप्रणाली और बैठकों से जुड़ी जानकारी भी मांगी गई थी। आवेदक ने कारागार में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति से संबंधित विवरण भी मांगा। इसमें स्वास्थ्यकर्मियों के स्वीकृत पदों, कार्यरत कर्मचारियों और रिक्त पदों की संख्या की जानकारी शामिल थी।
जेल की क्षमता और बंदियों की संख्या का भी देना होगा ब्योरा
मामले में जिला कारागार की निर्धारित क्षमता और वर्तमान में वहां बंद कैदियों की संख्या से जुड़ी जानकारी भी मांगी गई थी। इस तरह आरटीआई आवेदन के जरिए भोजन व्यवस्था के साथ जेल में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं और बंदियों की स्थिति का विवरण प्राप्त करने का प्रयास किया गया। आवेदक के मुताबिक, निर्धारित प्रक्रिया के बावजूद संतोषजनक जानकारी नहीं मिलने पर उन्होंने पहले विभागीय अपील की। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं होने पर मामला राज्य सूचना आयोग तक पहुंचा।
सात दिन में जानकारी देने के निर्देश
सुनवाई के दौरान राज्य सूचना आयुक्त कुशला नंद कोठियाल ने कहा कि मांगी गई सूचनाएं सामान्य प्रकृति की हैं और कैदियों के हितों से जुड़ी हैं। ऐसे में संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। आयोग ने जिला कारागार प्रशासन को सात दिन के भीतर सभी मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश के बाद अब जेल में भोजन के बजट, खर्च, गुणवत्ता जांच व्यवस्था, स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता और बंदियों की संख्या से संबंधित जानकारी मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
