जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई..

जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई..

 

देश-विदेश: सुप्रीम कोर्ट आज शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है। यह याचिका सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने भारत के चीफ जस्टिस बीआर गवई के समक्ष उल्लेखित की थी। मुख्य न्यायाधीश ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा था कि इसकी सुनवाई 8 अगस्त (शुक्रवार) को होगी। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ करेगी। याचिका में तर्क दिया गया है कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करना वहां के लोगों के संवैधानिक अधिकार और लोकतांत्रिक ढांचे के लिए आवश्यक है। अदालत में आज दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी और यह देखा जाएगा कि राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर केंद्र सरकार की क्या प्रतिक्रिया रहती है।

जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है। यह याचिका जहूर अहमद भट और कार्यकर्ता खुर्शीद अहमद मलिक ने दायर की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि राज्य का दर्जा बहाल करने में लगातार हो रही देरी जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के अधिकारों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है और संघवाद के विचार का उल्लंघन कर रही है। दोनों ने तर्क दिया है कि समयबद्ध ढांचे के भीतर राज्य का दर्जा बहाल न करना संघवाद का उल्लंघन है, जो संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 370 पर दिए गए उस फैसले का भी उल्लेख है, जिसमें तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के इस बयान पर भरोसा किया था कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ कर रही है। अदालत आज केंद्र सरकार से इस पर जवाब मांगेगी और राज्य का दर्जा बहाल करने की दिशा में अगले कदम पर विचार करेगी।

याचिका में तर्क दिया गया है कि समयबद्ध ढांचे के भीतर राज्य का दर्जा बहाल न करना संघवाद के उस सिद्धांत के खिलाफ है, जो संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है। इसमें अनुच्छेद 370 पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया गया है, जिसमें तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के इस बयान पर भरोसा किया था कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा।हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले में भारत के चुनाव आयोग को आदेश दिया था कि वह 30 सितंबर 2024 तक पुनर्गठन अधिनियम की धारा 14 के तहत गठित जम्मू-कश्मीर विधानसभा के चुनाव कराने के लिए कदम उठाए और राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल किया जाए। पिछली सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया था कि गृह मंत्रालय फिलहाल राज्य का दर्जा बहाल करने की कोई सटीक समयरेखा नहीं दे सकता और इसमें कुछ समय लगेगा। बता दे कि मई 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपने फैसले को चुनौती देने वाली समीक्षा याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि रिकॉर्ड पर कोई स्पष्ट त्रुटि नहीं पाई गई, साथ ही इसे खुली अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से भी इनकार कर दिया गया था।

 

 

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *