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उत्तराखंड वन क्षेत्र पर्यटन योजना तेज़, CS ने ट्रैकिंग और स्पॉट विकास के लिए पॉलिसी बनाई..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में ईको टूरिज्म की अपार संभावनाओं को धरातल पर उतारने की दिशा में सरकार ने तेज़ी से कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। सोमवार को सचिवालय में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में वन विभाग के अंतर्गत ईको टूरिज्म से संबंधित उच्च अधिकार प्राप्त समिति की अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें ईको टूरिज्म को व्यवस्थित और सतत रूप से विकसित करने पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश का बड़ा भू-भाग वन क्षेत्र से आच्छादित होने के कारण उत्तराखंड में ईको टूरिज्म की असीम संभावनाएं हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि इन संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए ऐसे ईको टूरिज्म स्पॉट चिन्हित किए जाएं, जिन्हें पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हुए विकसित किया जा सके।

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने ट्रैकिंग और माउंटेनियरिंग गतिविधियों को लेकर एक इंटीग्रेटेड पॉलिसी तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी 15 जनवरी तक अंतिम रूप देकर शासन को प्रस्तुत की जाए। पॉलिसी निर्माण से पहले निजी क्षेत्र के स्टेकहोल्डर्स से संवाद करने के भी निर्देश दिए गए, ताकि भविष्य में किसी तरह की व्यवहारिक समस्याएं सामने न आएं।

नई चोटियों और ट्रैकिंग रूट्स खोलने पर जोर..

मुख्य सचिव ने ट्रैकिंग के लिए नई चोटियों और रूट्स खोलने की दिशा में भी कार्य तेज करने को कहा। इसके लिए पर्यावरण ऑडिट सहित सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने और स्पष्ट एसओपी जारी करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि ईको टूरिज्म का विकास पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलन बनाकर ही किया जाना चाहिए। बैठक में चौरासी कुटिया (बीटल्स आश्रम) के जीर्णोद्धार कार्य को भी शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कार्यदायी संस्था को समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने, स्पष्ट टाइमलाइन तय करने और लक्ष्यों के आधार पर कार्य पूर्ण करने को कहा, ताकि परियोजना में अनावश्यक देरी न हो।

जबरखेत मॉडल को अन्य स्थलों पर लागू करने के निर्देश..

मुख्य सचिव ने ईको टूरिज्म के सफल जबरखेत मॉडल को अन्य चिन्हित ईको टूरिज्म स्थलों पर भी लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने संभागीय वन अधिकारियों (डीएफओ) को जिम्मेदारी सौंपते हुए कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करें। साथ ही, 10 चिन्हित ईको टूरिज्म साइट्स का विस्तृत प्लान एक माह के भीतर शासन को भेजने के निर्देश भी दिए गए।

ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड को किया जाएगा मजबूत..

मुख्य सचिव ने वन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों के संचालन के लिए स्पष्ट मैकेनिज्म विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों का संचालन ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड (ETDB) के माध्यम से किया जा सकता है, क्योंकि बोर्ड का गठन इसी उद्देश्य से किया गया है। इसके लिए ईटीडीबी को मजबूत करने, मैनपावर बढ़ाने और बजट में आवश्यक प्रावधान करने के निर्देश दिए गए। अपर सचिव वन को ईटीडीबी के लिए नया बजट हेड खोलने के निर्देश भी दिए गए, ताकि उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड (UTDB) की तर्ज पर ईटीडीबी को भी नियमित ग्रांट उपलब्ध कराई जा सके। ईको टूरिज्म साइट्स के संचालन के लिए शीघ्र ही एमओयू करने के भी निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि ईको टूरिज्म से संबंधित हाईपावर समिति की बैठक अब हर माह आयोजित की जाएगी, ताकि योजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा हो सके।

प्रदेशभर में फॉर्मल ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन की व्यवस्था..

बैठक में पर्यटन से जुड़े मानव संसाधन विकास पर भी विशेष जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने प्रदेशभर में ईको टूरिज्म और पर्यटन गतिविधियों के लिए फॉर्मल ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी दिया जाए और सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया एक ही मंच से संचालित की जाए। उन्होंने प्रशिक्षण और प्रमाणीकरण की जिम्मेदारी पर्यटन विभाग को सौंपने की बात कही साथ ही उच्च शिक्षा विभाग से भी आवश्यक सुझाव लेने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रशिक्षित मानव संसाधन से न केवल पर्यटन की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

 

 

 

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