चुनाव आयोग की स्वीकृति के बिना नहीं बदले जाएंगे अफसर, सरकार ने लागू की नई व्यवस्था..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में प्रशासनिक अधिकारियों के तबादलों को लेकर नई व्यवस्था लागू हो गई है। अब राज्य में चुनाव आयोग की पूर्व अनुमति के बिना प्रशासनिक अधिकारियों का स्थानांतरण नहीं किया जा सकेगा। यह व्यवस्था मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन- एसआईआर) अभियान को सुचारु रूप से संचालित करने के उद्देश्य से लागू की गई है। राज्य में आगामी दिनों में मतदाता सूची को अद्यतन करने के लिए व्यापक स्तर पर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस प्रक्रिया में जिला प्रशासन के अधिकारियों, कर्मचारियों, शिक्षकों और बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि पुनरीक्षण कार्य पूरा होने तक संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों पर विशेष नियंत्रण रखा जाएगा।
चुनाव आयोग लंबे समय से विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम की तैयारियों में जुटा हुआ है। इसके तहत बूथों का पुनर्गठन, बीएलओ मैपिंग, प्रशिक्षण कार्यक्रम और अन्य प्रशासनिक तैयारियां पहले से जारी हैं। हाल ही में इस अभियान से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रशिक्षण भी शुरू किया गया है। आयोग के कार्यक्रम के अनुसार विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान 8 जून से शुरू होकर 7 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान राज्य के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी और शिक्षक मतदाता सूची से जुड़े कार्यों में तैनात रहेंगे।
चुनाव आयोग का मानना है कि यदि इस महत्वपूर्ण अवधि के दौरान अधिकारियों का बड़े पैमाने पर स्थानांतरण किया जाता है तो मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। नए अधिकारियों को कार्यभार समझने और व्यवस्थाओं को संभालने में समय लग सकता है, जिससे अभियान की गति और गुणवत्ता पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसी कारण आयोग ने निर्देश दिया है कि पुनरीक्षण कार्य पूरा होने तक किसी भी प्रशासनिक अधिकारी के तबादले के लिए उसकी पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी। यदि आयोग किसी प्रस्तावित तबादले को उचित नहीं मानता है तो संबंधित अधिकारी का स्थानांतरण नहीं किया जा सकेगा।
चुनाव आचार संहिता जैसी व्यवस्था..
विशेषज्ञों के अनुसार यह व्यवस्था काफी हद तक चुनाव आचार संहिता के दौरान लागू होने वाले तबादला नियमों जैसी है। चुनावी प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों के दौरान प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखने के लिए आयोग को यह अधिकार प्राप्त है कि वह अधिकारियों के स्थानांतरण पर निगरानी रखे और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें रोके। इसी नई व्यवस्था के तहत शुक्रवार को राज्य सरकार ने चुनाव आयोग की अनुमति मिलने के बाद कुछ प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले किए। प्रशासनिक फेरबदल में देहरादून के सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह को हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण में सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं रुड़की नगर निगम में नगर आयुक्त के पद पर कार्यरत राकेश तिवारी को देहरादून का नया सिटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया है। उन्हें संयुक्त सचिव एमडीडीए का अतिरिक्त दायित्व भी दिया गया है। इसके साथ ही पहले से प्रतीक्षा सूची में चल रहे गोपाल राम बिनवाल को नगर आयुक्त रुड़की की जिम्मेदारी सौंपते हुए नई तैनाती दी गई है।
चुनाव आयोग की इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची पुनरीक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य को बिना किसी व्यवधान के पूरा कराना है। अधिकारियों के बार-बार तबादलों से बचते हुए प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि राज्य में मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाया जा सके। आने वाले एक माह तक प्रशासनिक तबादलों से जुड़े अधिकांश मामलों में चुनाव आयोग की भूमिका निर्णायक बनी रहेगी और सरकार को किसी भी प्रस्तावित स्थानांतरण से पहले आयोग की सहमति प्राप्त करनी होगी।
