July 10, 2026
उत्तराखंड में बिजली आपूर्ति मजबूत करने की कवायद, 1320 मेगावाट बिजली खरीद का रास्ता साफ..

उत्तराखंड में बिजली आपूर्ति मजबूत करने की कवायद, 1320 मेगावाट बिजली खरीद का रास्ता साफ..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में बढ़ती बिजली मांग और भविष्य में संभावित ऊर्जा संकट को देखते हुए राज्य के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। करीब दो साल से लंबित 1320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली खरीद योजना को उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) ने मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) को 25 साल की लंबी अवधि के लिए बिजली खरीदने का रास्ता साफ हो गया है। इस योजना के तहत यूपीसीएल ऐसी कंपनी से बिजली खरीदेगा, जो केंद्र सरकार की ओर से राज्य को पहले से आवंटित कोयला लिंकेज का इस्तेमाल कर बिजली उत्पादन करेगी। प्रस्तावित बिजली आपूर्ति वित्तीय वर्ष 2030-31 से शुरू होने की संभावना है। विद्युत नियामक आयोग की पीठ ने बुधवार को इस मामले में अंतिम आदेश जारी किया। पीठ में आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य (विधि) अनुराग शर्मा और सदस्य (तकनीकी) प्रभात किशोर डिमरी शामिल रहे।

बढ़ती मांग के बीच अहम फैसला

राज्य में लगातार बढ़ रही बिजली खपत और बाहरी स्रोतों से बिजली खरीद पर बढ़ती निर्भरता को देखते हुए इस योजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की रिसोर्स एडिक्वेसी स्टडी में भी भविष्य में बिजली की कमी को लेकर चिंता जताई गई थी। अनुमान के मुताबिक यदि समय रहते बिजली उत्पादन और खरीद क्षमता नहीं बढ़ाई गई तो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड में बिजली की कमी बढ़ सकती है। मौजूदा आकलनों में वर्ष 2025-26 में बिजली की कमी करीब 13 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो वर्ष 2035-36 तक बढ़कर लगभग 30 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को 24 घंटे निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने, ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए यह दीर्घकालिक बिजली खरीद योजना अहम मानी जा रही है।

प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया से होगी बिजली खरीद

यूपीसीएल इस बिजली की खरीद टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से करेगा। इसके लिए केंद्र सरकार की शक्ति नीति के तहत उत्तराखंड को 1320 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए कोयला लिंकेज पहले ही आवंटित किया जा चुका है। कोयला लिंकेज की समयसीमा समाप्त होने से पहले इसका उपयोग करना राज्य के हित में जरूरी माना गया। अब निविदा प्रक्रिया पूरी करने और संबंधित कंपनी के साथ पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) करने से पहले यूपीसीएल को राज्य सरकार से औपचारिक अनुमति लेनी होगी। आयोग ने योजना को मंजूरी देते हुए यूपीसीएल के सामने एक नई चुनौती भी रखी है। आयोग के अनुसार मानसून के दौरान जुलाई से सितंबर तक राज्य में बिजली की उपलब्धता जरूरत से अधिक हो सकती है। ऐसे में अतिरिक्त बिजली के बेहतर प्रबंधन के लिए बैंकिंग या व्यापार जैसी व्यवस्थाओं की ठोस योजना तैयार करनी होगी, ताकि सर्दियों में बिजली की कमी के समय इसका उपयोग किया जा सके। इसके अलावा बदलते बिजली क्षेत्र, बढ़ते सौर ऊर्जा उत्पादन और पंप स्टोरेज जैसी नई तकनीकों के बेहतर संचालन के लिए आयोग ने यूपीसीएल को तकनीकी विशेषज्ञों से युक्त एक पावर मैनेजमेंट ग्रुप बनाने का सुझाव भी दिया है।

2040 तक बिजली की मांग में भारी बढ़ोतरी का अनुमान

यूपीसीएल के अनुमान के अनुसार आने वाले वर्षों में राज्य में बिजली की मांग लगातार बढ़ती जाएगी। वर्ष 2030-31 में बिजली की मांग करीब 2329 करोड़ यूनिट रहने का अनुमान है, जो वर्ष 2039-40 तक बढ़कर लगभग 3540 करोड़ यूनिट तक पहुंच सकती है। आयोग ने यह भी अनुमान जताया है कि वर्ष 2030-31 में बिजली की कमी करीब 968 मेगावाट हो सकती है, जो वर्ष 2038-39 तक बढ़कर 2044 मेगावाट तक पहुंचने की संभावना है। बिजली की बढ़ती जरूरतों और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए 1320 मेगावाट बिजली खरीद योजना को उत्तराखंड की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

 

 

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