टनकपुर से कैलाश मानसरोवर यात्रा का 8वां दल रवाना..
यात्रियों ने की व्यवस्थाओं की जमकर सराहना..
उत्तराखंड: उत्तराखंड के चंपावत जिले स्थित टनकपुर से कैलाश मानसरोवर यात्रा का आठवां जत्था रविवार को पूरे उत्साह, श्रद्धा और पारंपरिक स्वागत के बीच अपने अगले पड़ाव के लिए रवाना हो गया। “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयकारों से गूंजते माहौल में 49 सदस्यीय दल को हरी झंडी दिखाकर विदा किया गया। इसके साथ ही इस वर्ष की कैलाश मानसरोवर यात्रा अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ गई है। उप जिला अस्पताल टनकपुर के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. घनश्याम तिवारी ने पर्यटक आवास गृह (टीआरसी) परिसर से यात्रियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर प्रशासनिक अधिकारी, कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) के प्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक भी मौजूद रहे। रवाना होने से पहले यात्रियों ने भगवान शिव का स्मरण किया और सफल व सुरक्षित यात्रा की कामना की।टनकपुर पहुंचने पर यात्रियों का पारंपरिक कुमाऊंनी रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया गया। स्थानीय कलाकारों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जबकि स्कूली बच्चों ने लोकगीत और लोकनृत्य के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश की। शनिवार शाम आयोजित स्वागत समारोह में शिवभक्तों को सम्मानित भी किया गया।
यात्रियों ने उत्तराखंड की मेहमाननवाजी, स्थानीय संस्कृति और यात्रा के दौरान उपलब्ध कराई गई व्यवस्थाओं की खुले दिल से सराहना की। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि टनकपुर में मिला आत्मीय स्वागत उनकी यात्रा की यादगार अनुभूतियों में शामिल रहेगा।टीआरसी प्रबंधन के अनुसार आठवें जत्थे में देश के 13 राज्यों से आए कुल 49 श्रद्धालु शामिल हैं। इनमें आंध्र प्रदेश, बिहार, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के श्रद्धालु शामिल हैं। यह यात्रा देश की सांस्कृतिक एकता और धार्मिक आस्था का भी प्रतीक बनकर सामने आ रही है, जहां विभिन्न राज्यों के लोग एक ही उद्देश्य से भगवान शिव के पवित्र धाम की यात्रा पर निकले हैं।
यात्रा मार्ग पर सुरक्षा और सुविधाओं के व्यापक इंतजाम
कैलाश मानसरोवर यात्रा को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए जिला प्रशासन और कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) द्वारा व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। यात्रियों के लिए आवास, भोजन, चिकित्सा सहायता, पेयजल, स्वच्छता और सुरक्षा जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम यात्रियों की नियमित स्वास्थ्य जांच भी कर रही है ताकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों की यात्रा के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो।प्रशासन का कहना है कि यात्रा के प्रत्येक पड़ाव पर सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की जा रही है। यात्रा मार्ग पर तैनात अधिकारी यात्रियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दे रहे हैं।
अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है यात्रा
इस वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा के तहत कुल 10 जत्थों को टनकपुर मार्ग से रवाना किया जाना है। आठवें दल के प्रस्थान के बाद अब केवल दो जत्थों का रवाना होना शेष है। ऐसे में यात्रा अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी है और पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का माहौल बना हुआ है। टनकपुर, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा का महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार माना जाता है, इन दिनों शिवभक्तों की आवाजाही से गुलजार है। स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसायियों और आम नागरिकों में भी यात्रा को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करती है। यात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालुओं के आगमन से स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलता है और प्रदेश की संस्कृति, परंपरा एवं आतिथ्य को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलती है। श्रद्धा, संस्कृति और बेहतर व्यवस्थाओं के समन्वय के साथ आगे बढ़ रही कैलाश मानसरोवर यात्रा एक बार फिर उत्तराखंड की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को देशभर में मजबूत कर रही है।
