September 5, 2026
cbi

चरस बरामदगी केस में बड़ा अपडेट, पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोपों की जांच करेगी CBI..

 

उत्तराखंड: केलाखेड़ा थाने में वर्ष 2020 में दर्ज एक चरस बरामदगी के मामले ने करीब छह साल बाद नया मोड़ ले लिया है। नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मामले में तत्कालीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि अनिल शर्मा को कथित तौर पर झूठे एनडीपीएस मामले में फंसाने के लिए उसके पास से 97.70 ग्राम चरस की बरामदगी दिखाई गई थी। सीबीआई ने हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में 3 सितंबर 2026 को केस दर्ज किया। जांच के दायरे में उस समय के छह पुलिसकर्मी हैं। इनमें तत्कालीन उप निरीक्षक प्रकाश चंद्र टम्टा, कांस्टेबल त्रिभुवन सिंह, चंदन सिंह बिष्ट, हरीश गिरी और विशेष पुलिस अधिकारी परवेज अहमद व राजवंत सिंह शामिल हैं।

2020 में हुई थी चरस बरामदगी की कार्रवाई
मामला 28 जुलाई 2020 का है। उस दिन केलाखेड़ा थाने में अनिल शर्मा के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस की ओर से दावा किया गया था कि उसके कब्जे से 97.70 ग्राम चरस बरामद हुई है। पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अनिल शर्मा ने बाद में नैनीताल हाईकोर्ट का रुख किया और अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को निरस्त करने की मांग की। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जांच को लेकर गंभीरता दिखाई और 7 अगस्त 2020 को सीबीआई के एसपी को प्रारंभिक जांच के निर्देश दिए थे। सीबीआई की प्रारंभिक जांच में पुलिस की कार्रवाई को लेकर कई सवाल सामने आए। रिपोर्ट में प्रथमदृष्टया यह बात सामने आने का उल्लेख है कि अनिल शर्मा को कथित रूप से चरस की फर्जी बरामदगी दिखाकर एनडीपीएस के मामले में फंसाया गया।

जांच रिपोर्ट में पुलिस रिकॉर्ड में कथित हेरफेर, मारपीट और अनिल शर्मा को जबरन पुलिस चौकी ले जाने जैसे आरोपों का भी जिक्र किया गया। इसके अलावा एक ढाबे में लगे सीसीटीवी कैमरों की पुरानी फुटेज कथित तौर पर डिलीट किए जाने की बात भी जांच के दौरान सामने आई। हाईकोर्ट के हालिया आदेश के बाद सीबीआई ने तत्कालीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक साजिश समेत भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। अब जांच एजेंसी पूरे घटनाक्रम में पुलिस की भूमिका और कथित फर्जी बरामदगी से जुड़े तथ्यों की पड़ताल करेगी। सीबीआई जांच के आदेश को चुनौती देते हुए संबंधित पुलिसकर्मी सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचे थे। वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के सीबीआई जांच संबंधी आदेश के एक हिस्से पर फिलहाल रोक लगाई थी और मामले को दोबारा हाईकोर्ट के विचार के लिए भेजा था।

इसके बाद 11 अगस्त 2026 को नैनीताल हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने पुलिस के आचरण को लेकर निष्पक्ष जांच पर सवाल उठाते हुए पुलिसकर्मियों के खिलाफ लगे आरोपों और अनिल शर्मा को कथित रूप से झूठे एनडीपीएस मामले में फंसाने के पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सीबीआई ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ नया मुकदमा दर्ज करने के साथ ही वर्ष 2020 में अनिल शर्मा के खिलाफ दर्ज मूल एनडीपीएस केस को भी अपनी जांच के दायरे में ले लिया है। अब सीबीआई देहरादून दोनों मामलों की जांच करेगी। जांच में कथित चरस बरामदगी की परिस्थितियों, पुलिस रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, संबंधित लोगों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही मामले में आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

 

 

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *