गोसेवा आयोग की समीक्षा बैठक में कई अहम फैसले, गौसदनों और गोवंश संरक्षण पर जोर..
उत्तराखंड: उत्तराखंड गो सेवा आयोग ने गोवंश संरक्षण और गौसदनों की व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन को तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। विकास भवन सभागार में आयोग के अध्यक्ष पंडित डॉ. राजेंद्र अण्थवाल की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में गौसदनों की व्यवस्थाओं, अनुदान, गोवंश की निगरानी और अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई समेत कई बिंदुओं पर चर्चा की गई। बैठक में अध्यक्ष ने अधिकारियों से कहा कि नए गौसदनों के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। इसके लिए अधिकतम 15 दिन की समयसीमा तय की गई है। उन्होंने ग्राम्य गोसेवकों की स्थिति के साथ गौसदनों को उपलब्ध कराए जा रहे सरकारी अनुदान और लंबित भुगतानों की भी जानकारी ली।
गोवंश छोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
समीक्षा के दौरान गोवंश संरक्षण अधिनियम, 2007 की धारा 7 और 8 के उल्लंघन से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई। आयोग अध्यक्ष ने अधिकारियों को ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए उन्होंने गोवंश के जन्म और मृत्यु का नियमित रिकॉर्ड रखने, डेयरियों का पंजीकरण कराने और समय-समय पर उनका निरीक्षण करने को कहा। इसके अलावा सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर गोवंश को लावारिस छोड़ने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। जिन स्थानीय निकायों में गोवंश को उठाने के लिए लिफ्टिंग वैन उपलब्ध नहीं है, वहां तत्काल वाहन की व्यवस्था करने को कहा गया है, ताकि निराश्रित गोवंश को समय पर गौसदनों तक पहुंचाया जा सके।
गोहत्या और तस्करी पर पुलिस की कार्रवाई की समीक्षा
बैठक में गोहत्या, गोकशी और गो तस्करी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस की ओर से की जा रही कार्रवाई की भी समीक्षा की गई। आयोग अध्यक्ष ने थाना और चौकी प्रभारियों को गोवंश से जुड़ी अवैध गतिविधियों के मामलों में गंभीरता से कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गोवंश संरक्षण को लेकर प्रशासन और पुलिस के स्तर पर समन्वय के साथ काम किया जाना जरूरी है। इसके साथ ही स्कूलों के विद्यार्थियों के माध्यम से भी गोवंश संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
जिले में 25 गौसदन, 2653 निराश्रित गोवंश
बैठक में सामने आया कि जिले में फिलहाल 25 गौसदन संचालित हैं। इनमें 21 गैर सरकारी और चार सरकारी गौसदन शामिल हैं। इन सभी में कुल 2,653 निराश्रित गोवंश रखे गए हैं। इसके अलावा जिले के 10 विकासखंडों में 32 ग्राम्य गोसेवक पंजीकृत हैं। पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक 2,76,076 गोवंश की ईयर टैगिंग की जा चुकी है, जबकि 73.61 प्रतिशत गोवंश का टीकाकरण पूरा हो चुका है। बैठक में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित, निर्माणाधीन तथा प्रस्तावित गौसदनों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। नए गौसदनों के लिए भूमि उपलब्धता, लंबित प्रस्तावों और निर्माण से जुड़े मामलों पर अधिकारियों से जानकारी ली गई। अध्यक्ष ने संबंधित विभागों को लंबित प्रक्रियाओं में तेजी लाने और गोवंश संरक्षण से जुड़े कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।
