मदरसों पर कार्रवाई तेज, 72 और हुए बंद..
दो महीने में करीब आधे संस्थानों का संचालन ठप..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में बिना मान्यता संचालित हो रहे मदरसों पर प्रशासन की कार्रवाई लगातार जारी है। शासन स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार प्रदेश में अब तक 179 मदरसे बंद किए जा चुके हैं, जबकि 19 संस्थानों को सील किया गया है। वहीं, 54 ऐसे मदरसे भी सामने आए हैं, जिन्होंने अभी तक मान्यता के लिए शिक्षा विभाग में आवेदन तक नहीं किया है। प्रदेश में कुल 452 मदरसे बताए गए हैं। इनमें से अब तक सिर्फ 33 मदरसों को शिक्षा विभाग से मान्यता मिली है, जबकि 134 संस्थानों ने मान्यता के लिए आवेदन किया है। विभाग की ओर से प्राप्त आवेदनों की जांच की जा रही है और मानक पूरे नहीं करने वाले कुछ आवेदन निरस्त भी किए गए हैं।
हरिद्वार में सबसे ज्यादा मदरसे बंद
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कार्रवाई का सबसे ज्यादा असर हरिद्वार जिले में दिखाई दिया है। यहां अब तक 102 मदरसे बंद किए जा चुके हैं। इसके बाद ऊधमसिंह नगर में 55, देहरादून में 12 और नैनीताल में 10 मदरसों पर कार्रवाई हुई है। विभागीय स्तर पर आने वाले दिनों में ऐसे अन्य संस्थानों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी है, जो निर्धारित मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं या मान्यता प्रक्रिया से बाहर हैं।
मान्यता के लिए आवेदन करने वालों की भी जांच
शिक्षा विभाग के अनुसार प्रदेश के 134 मदरसों ने मान्यता के लिए आवेदन किया है। इनमें हरिद्वार के 76, ऊधमसिंह नगर के 48, देहरादून के आठ और नैनीताल के दो मदरसे शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार आवेदन कर देना ही पर्याप्त नहीं है। संबंधित संस्थानों को निर्धारित शैक्षणिक और अन्य जरूरी मानकों को पूरा करना होगा। जांच के दौरान मानक पूरे नहीं मिलने पर आवेदन निरस्त भी किए जा सकते हैं। सरकार ने करीब दो महीने पहले राज्य में मदरसा बोर्ड की व्यवस्था समाप्त कर राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण लागू किया था। सरकार की ओर से व्यवस्था में बदलाव का उद्देश्य मदरसा शिक्षा को व्यापक और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था से जोड़ना बताया गया है। अधिकारियों का कहना हैं कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को आगे की पढ़ाई और रोजगार के लिए दूसरे विद्यार्थियों की तरह समान अवसर मिल सकें। इसी क्रम में मान्यता के लिए निर्धारित मानकों को पूरा करना जरूरी किया गया है।
बिना मान्यता संचालित संस्थानों के बंद होने के बाद अब सरकार के सामने वहां पढ़ रहे बच्चों की शिक्षा को लेकर भी चुनौती है। प्रशासन और शिक्षा विभाग के सामने यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी कि कार्रवाई की वजह से कोई बच्चा पढ़ाई से बाहर न हो। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए आवश्यक वैकल्पिक व्यवस्था पर भी काम किया जाएगा। सरकार का कहना है कि मदरसा शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे बदलाव का उद्देश्य बच्चों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराना है। साथ ही निर्धारित नियमों और मानकों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
