राजाजी के जंगलों में फिर सुनाई देगी बाघों की दहाड़, दूसरे चरण में आएंगे पांच नए बाघ.. - newenergystate
राजाजी के जंगलों में फिर सुनाई देगी बाघों की दहाड़, दूसरे चरण में आएंगे पांच नए बाघ..

राजाजी के जंगलों में फिर सुनाई देगी बाघों की दहाड़, दूसरे चरण में आएंगे पांच नए बाघ..

 

 

उत्तराखंड: राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों की आबादी बढ़ाने की दिशा में वन विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। योजना के दूसरे चरण में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से पांच बाघों को राजाजी में लाने की तैयारी है। इनमें तीन बाघिन और दो नर बाघ शामिल होंगे। पार्क प्रशासन की कोशिश है कि जनवरी 2027 के पहले पखवाड़े तक शिफ्टिंग की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी हिस्से में बाघों की स्थायी आबादी विकसित करना है। इसके लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) से पहले ही सहमति मिल चुकी है। पार्क प्रशासन ने शिफ्टिंग के लिए आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस बार पिछली प्रक्रिया के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

वनकर्मियों को दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण
बाघों की शिफ्टिंग से पहले राजाजी टाइगर रिजर्व के कर्मचारियों के साथ देहरादून, रायवाला और हरिद्वार वन प्रभाग के वनकर्मियों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से चल रहे प्रशिक्षण में बाघों की गतिविधियों पर नजर रखने, उनके पदचिह्न और अन्य संकेतों की पहचान करने तथा कैमरा ट्रैप लगाने की जानकारी दी जा रही है। इसके अलावा अलग-अलग वन प्रभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर है। नवंबर में उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के वनकर्मियों को भी प्रशिक्षण देने की योजना है, ताकि बाघों की निगरानी और संरक्षण से जुड़े कार्यों को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सके।

पहले चरण में पांच बाघ किए गए थे शिफ्ट
राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ाने की योजना वर्ष 2016 में तैयार की गई थी। वर्ष 2018 में एनटीसीए से मंजूरी मिलने के बाद दिसंबर 2020 में पहले बाघ को कॉर्बेट से मोतीचूर क्षेत्र में लाया गया था। इसके बाद जनवरी 2021, मई 2023, मार्च 2024 और मई 2025 में चार अन्य बाघों को शिफ्ट किया गया। इस तरह पहले चरण में कुल पांच बाघ राजाजी टाइगर रिजर्व में लाए गए, जिनमें दो नर और तीन मादा बाघ शामिल थे। इनमें से एक बाघिन ने चार शावकों को जन्म भी दिया था। हालांकि, सभी शावक जीवित नहीं बच सके। जानकारी के अनुसार, फिलहाल पार्क क्षेत्र में दो मादा और एक नर बाघ की मौजूदगी है, जबकि दो बाघिनों की लोकेशन लंबे समय से ट्रेस नहीं हो पा रही है। आशंका है कि वे हिमाचल प्रदेश की सीमा की ओर चली गई हैं। वन विभाग उनकी तलाश में जुटा है।

शावकों की मौत से प्रभावित हुई थी योजना
राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों की स्थायी आबादी विकसित करने के प्रयासों के बीच वर्ष 2024 में चार शावकों का जन्म बड़ी उपलब्धि माना गया था। इससे पार्क प्रशासन को उम्मीद थी कि पश्चिमी क्षेत्र में बाघों की संख्या प्राकृतिक रूप से भी बढ़ेगी। हालांकि, बाद में शावकों के सामने चुनौतियां खड़ी हो गईं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दो शावकों की मौत गुलदार के हमले से होने के संकेत मिले थे, जबकि बाकी दो शावकों का भी पता नहीं चल पाया। इस घटना के बाद बाघों और उनके शावकों की सुरक्षा तथा नियमित निगरानी को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई।

पश्चिमी राजाजी में स्थायी आबादी विकसित करने पर जोर
कॉर्बेट से पांच और बाघों को लाने की योजना को राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी हिस्से में बाघों की आबादी मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। इससे क्षेत्र में बाघों की मौजूदगी बढ़ने के साथ वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। पार्क प्रशासन इस बार शिफ्टिंग के साथ-साथ बाघों की नियमित निगरानी, उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा और वनकर्मियों की क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रहा है। जनवरी में प्रस्तावित दूसरे चरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राजाजी में बाघों की आबादी को लेकर नई स्थिति सामने आएगी।

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