May 30, 2026
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हरिद्वार को मिलेगा हाईवे कनेक्टिविटी का बड़ा फायदा, 12 गांवों में जमीन बिक्री पर प्रतिबंध..

 

 

उत्तराखंड: उत्तर भारत की महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल पानीपत-गोरखपुर ग्रीनफील्ड राष्ट्रीय राजमार्ग को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं। परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को सुचारु रूप से आगे बढ़ाने के लिए हरिद्वार जिले के लक्सर क्षेत्र में स्थित 12 गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री, बैनामा, भूमि उपयोग परिवर्तन और नए निर्माण कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। प्रशासन का मानना है कि इससे भविष्य में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में किसी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक बाधा नहीं आएगी। प्रस्तावित ग्रीनफील्ड हाईवे उत्तर भारत के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों को बेहतर सड़क नेटवर्क के माध्यम से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना मानी जा रही है। इसके निर्माण से हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। खास तौर पर हरिद्वार जिले के लिए यह परियोजना आर्थिक और परिवहन दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के अंतर्गत आवश्यक कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है। भूमि अधिग्रहण से जुड़े क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के नए स्वामित्व परिवर्तन या भूमि उपयोग में बदलाव को रोकने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। जिन गांवों में प्रतिबंध लागू किया गया है उनमें मदारपुर, मिर्जापुर उर्फ मोहनवाला, पौड़ोवाली, टांडा जलालपुर, प्रहलादपुर, रघुनाथपुर उर्फ बालावाली, बालचंदवाला, अलामपुर, हस्तमौली, शाहपुर, गिद्धावाली और कलसिया शामिल हैं। इन गांवों में अब प्रशासन की अनुमति के बिना जमीन से जुड़े किसी भी प्रकार के लेन-देन या विकास कार्य नहीं किए जा सकेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीनफील्ड हाईवे के निर्माण से क्षेत्र में औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। बेहतर सड़क संपर्क के कारण माल परिवहन की लागत कम होगी और विभिन्न राज्यों के बीच आवागमन भी आसान हो जाएगा। इससे स्थानीय उद्योगों, कृषि उत्पादों की आवाजाही और निवेश की संभावनाओं को भी बल मिलने की उम्मीद है। हरिद्वार जैसे धार्मिक और पर्यटन केंद्र को भी इस परियोजना से बड़ा फायदा मिलने की संभावना है। देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यात्रा अधिक सुगम होगी, जबकि कांवड़ यात्रा और अन्य बड़े आयोजनों के दौरान यातायात प्रबंधन में भी मदद मिलेगी। बेहतर कनेक्टिविटी के चलते होटल व्यवसाय, ट्रांसपोर्ट सेक्टर, वेयरहाउसिंग और छोटे-बड़े कारोबारों को भी नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

प्रशासन ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया से जुड़े सभी आदेशों का सख्ती से पालन कराया जाए। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि परियोजना से संबंधित कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे हों और किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने न आए। सरकार और प्रशासन की नजर अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने पर है। माना जा रहा है कि हाईवे के निर्माण के बाद उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी और क्षेत्रीय विकास को भी मजबूती मिलेगी।

 

 

 

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