September 16, 2026
kishau dam

एशिया के ऊंचे बांधों में शामिल होगा किशाऊ..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बीच प्रस्तावित किशाऊ बांध परियोजना को लेकर एक बार फिर उम्मीदें बढ़ी हैं। टोंस नदी पर बनने वाला यह बांध पूरा होने के बाद करीब 232 मीटर ऊंचा होगा। इस ऊंचाई के साथ किशाऊ देश का दूसरा सबसे ऊंचा बांध बनने की दिशा में है। परियोजना से बिजली उत्पादन के साथ कई राज्यों की सिंचाई और पेयजल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है। किशाऊ परियोजना का निर्माण उत्तराखंड के देहरादून क्षेत्र में टोंस नदी और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की सीमा के आसपास प्रस्तावित है। बांध की लंबाई करीब 680 मीटर और जलाशय की क्षमता लगभग 1562 मिलियन क्यूबिक मीटर बताई गई है।

422 मेगावाट बिजली का होगा उत्पादन

परियोजना से करीब 422 मेगावाट बिजली पैदा करने की योजना है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार उत्पादित बिजली का आधा हिस्सा उत्तराखंड और आधा हिमाचल प्रदेश को मिलेगा। यानी दोनों राज्यों को लगभग 211-211 मेगावाट बिजली प्राप्त होगी। किशाऊ बांध को केंद्र सरकार ने वर्ष 2008 में राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया था। इस व्यवस्था के तहत परियोजना की लागत का बड़ा हिस्सा केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाना प्रस्तावित है। मौजूदा प्रावधान के अनुसार करीब 90 प्रतिशत खर्च केंद्र से मिलने की बात कही गई है।

32 किलोमीटर लंबी होगी जलाशय झील

बांध बनने के बाद करीब 32 किलोमीटर लंबा जलाशय तैयार होने की संभावना है। यह झील मोहराड़ से त्यूनी तक के क्षेत्र में फैलेगी। परियोजना का उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। इससे उत्तराखंड के साथ हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली को सिंचाई एवं जलापूर्ति में लाभ मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से दिल्ली की जल जरूरतों को पूरा करने में इस परियोजना की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

हजारों पेड़ और कई बस्तियां होंगी प्रभावित

परियोजना के कारण उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में बड़े पैमाने पर भू-क्षेत्र प्रभावित होने का अनुमान है। अब तक के सर्वे के अनुसार करीब 1,452 हेक्टेयर भूमि प्रभावित हो सकती है। परियोजना क्षेत्र में करीब 81,300 पेड़ों के प्रभावित होने का अनुमान है। इसके साथ ही लकड़ी और पक्के मकानों सहित कई आवासीय ढांचे, परिवार और सार्वजनिक संस्थान भी प्रभावित क्षेत्र में आ सकते हैं। सर्वे में मंदिर, पंचायत भवन, अस्पताल और स्कूलों के भी जलाशय क्षेत्र में आने की बात सामने आई है।

1985 में तैयार हुई थी पहली DPR

किशाऊ परियोजना की पहली विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR वर्ष 1985 में तैयार की गई थी। इसके बाद वर्ष 2010 में DPR को दोबारा तैयार किया गया। अब परियोजना की संशोधित DPR केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 15 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है, हालांकि अंतिम लागत में बदलाव संभव है। फिलहाल केंद्र स्तर पर परियोजना से जुड़े प्रस्ताव और आगे की प्रक्रिया पर निर्णय होना बाकी है।

2035 तक बिजली-पानी मिलने की उम्मीद

यदि परियोजना की मंजूरियां और निर्माण प्रक्रिया तय समय के अनुसार आगे बढ़ती है, तो करीब 2035 तक किशाऊ परियोजना से बिजली और पानी का लाभ मिलना शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। किशाऊ बांध के आकार और ऊंचाई को देखते हुए इसे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजनाओं में शामिल किया जा रहा है। परियोजना पूरी होने पर बिजली उत्पादन के साथ जल भंडारण, सिंचाई और विभिन्न क्षेत्रों में जलापूर्ति को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

 

 

 

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