October 1, 2026
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सोलर बिजली महंगी करने की मांग नहीं मानी, उत्तराखंड में 19% CUF पर आयोग की मुहर..

 

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए निर्धारित क्षमता उपयोग कारक (CUF) में बदलाव की मांग को विद्युत नियामक आयोग ने स्वीकार नहीं किया है। आयोग ने 19 प्रतिशत CUF के मौजूदा मानक को बरकरार रखते हुए आरई पावर जनरेटर्स सोसाइटी की याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही फिलहाल सोलर बिजली के मौजूदा बेंचमार्क टैरिफ में बदलाव का रास्ता भी साफ नहीं हुआ है। सोसाइटी ने आयोग के समक्ष दायर याचिका में वर्ष 2023 के नवीकरणीय ऊर्जा विनियमों में निर्धारित 19 प्रतिशत CUF को घटाकर 17 प्रतिशत करने की मांग की थी। संस्था का कहना था कि राज्य के पहाड़ी इलाकों की भौगोलिक और प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण सोलर प्लांट अपेक्षित मात्रा में बिजली का उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं।

याचिका में सोलर बिजली उत्पादन से जुड़ी कई व्यावहारिक चुनौतियों का उल्लेख किया गया था। सोसाइटी के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में ऊंची चोटियों और ढलानों के कारण सुबह और शाम के समय सोलर पैनलों तक पर्याप्त धूप नहीं पहुंच पाती। वहीं, पहाड़ी भूभाग पर पैनलों को दक्षिण दिशा में आवश्यक कोण पर स्थापित करना भी आसान नहीं है। संस्था का दावा था कि इन परिस्थितियों के चलते राज्य में स्थापित नए मोनोक्रिस्टलाइन सोलर प्लांटों का औसत CUF करीब 15 से 17 प्रतिशत के बीच रह रहा है। ऐसे में 19 प्रतिशत CUF को आधार बनाकर तय 4.10 रुपये प्रति यूनिट की दर पर परियोजनाओं को आर्थिक रूप से संचालित करना मुश्किल हो रहा है। सोसाइटी ने तर्क दिया कि वास्तविक उत्पादन कम रहने से परियोजना संचालकों की लागत की भरपाई प्रभावित हो रही है। इसी आधार पर CUF मानक को 17 प्रतिशत करने और उसके अनुरूप सोलर बिजली के टैरिफ में संशोधन की मांग की गई थी।

यूपीसीएल और उरेडा ने मांग का किया विरोध
मामले की सुनवाई के दौरान उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) और उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (उरेडा) ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई। दोनों संस्थाओं की ओर से कहा गया कि CUF का मानक कम किए जाने पर सोलर बिजली की निर्धारित दर बढ़ सकती है। इसका असर बिजली वितरण कंपनियों पर पड़ने के साथ उपभोक्ताओं पर भी अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ने की संभावना है। यूपीसीएल और उरेडा ने आधुनिक सोलर तकनीक का भी हवाला दिया। उनके अनुसार मोनो-पर्क और बाइफेशियल जैसे आधुनिक पैनल पहले की तुलना में ज्यादा दक्ष हैं और राज्य में कुछ परियोजनाएं चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद 19 प्रतिशत या उससे अधिक CUF हासिल कर रही हैं। यूपीसीएल ने यह भी पक्ष रखा कि पांच वर्ष की निर्धारित नियंत्रण अवधि के बीच CUF के मानक में बदलाव करने से नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में नियामकीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है।

आयोग ने कहा- सामान्य नियम बदलने के लिए अलग प्रक्रिया जरूरी
मामले की सुनवाई उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, विधि सदस्य अनुराग शर्मा और तकनीकी सदस्य प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने की। सभी पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने सोसाइटी की याचिका को खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी विशेष परियोजना या मामले में व्यक्तिगत कठिनाई के समाधान के लिए उपलब्ध प्रावधानों का इस्तेमाल पूरे राज्य में लागू सामान्य नियम को बदलने के लिए नहीं किया जा सकता। आयोग के मुताबिक CUF एक सामान्य तकनीकी मानक है। इसमें राज्यव्यापी बदलाव के लिए नियामक प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होगा। इसके तहत आयोग को अपनी विधायी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए मसौदा अधिसूचना जारी करनी होगी और संबंधित पक्षों से आपत्तियां एवं सुझाव आमंत्रित करने होंगे।

फिलहाल नहीं बदलेगा सोलर बिजली का मानक
आयोग के फैसले के बाद उत्तराखंड में सोलर बिजली परियोजनाओं के लिए 19 प्रतिशत CUF का मौजूदा मानक जारी रहेगा। वहीं, आरई पावर जनरेटर्स सोसाइटी की याचिका के आधार पर फिलहाल सोलर बिजली की दर में प्रस्तावित बढ़ोतरी भी नहीं होगी। फैसले से सोलर परियोजनाओं के लिए मौजूदा नियामकीय व्यवस्था फिलहाल यथावत बनी रहेगी।

 

 

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