July 30, 2026
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अर्धकुंभ-2027 होगा ऐतिहासिक, पहली बार अमृत स्नान के साथ संत समाज ने घोषित किया कार्यक्रम..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में आयोजित होने वाले हरिद्वार अर्धकुंभ-2027 की तैयारियों ने अब आधिकारिक रूप ले लिया है। संत समाज ने इस महाआयोजन के धार्मिक कार्यक्रमों की घोषणा करते हुए स्पष्ट किया है कि अर्धकुंभ को पूर्ण कुंभ की तरह ही दिव्य, भव्य और सनातन परंपराओं के अनुरूप आयोजित किया जाएगा। इस बार का अर्धकुंभ कई मायनों में विशेष रहने वाला है, क्योंकि पहली बार इसमें ‘अमृत स्नान’ का आयोजन भी किया जाएगा। गुरुपूर्णिमा के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में संत समाज की ओर से अर्धकुंभ-2027 का विस्तृत धार्मिक कैलेंडर जारी किया गया। संतों का कहना है कि यह आयोजन केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, अखाड़ा व्यवस्था और आध्यात्मिक विरासत का विराट उत्सव होगा।संत समाज के अनुसार अर्धकुंभ की तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई हैं। देशभर के विभिन्न अखाड़ों, साधु-संतों और धार्मिक संगठनों के सहयोग से पूरे आयोजन की रूपरेखा तैयार की जा रही है। आगामी महीनों में अखाड़ों की छावनियों, धार्मिक अनुष्ठानों और स्नान पर्वों की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा। संतों ने कहा कि हरिद्वार सदियों से सनातन आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है और अर्धकुंभ का आयोजन इस आध्यात्मिक परंपरा को और अधिक सशक्त करेगा। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए धार्मिक गतिविधियों की तैयारी चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी।

पहली बार होगा ‘अमृत स्नान’

अर्धकुंभ-2027 का सबसे बड़ा आकर्षण ‘अमृत स्नान’ रहेगा। अब तक कुंभ और अर्धकुंभ में शाही स्नान प्रमुख परंपरा मानी जाती रही है, लेकिन इस आयोजन में पहली बार अमृत स्नान की व्यवस्था की जा रही है। संत समाज का मानना है कि यह आयोजन अर्धकुंभ की धार्मिक गरिमा को नई पहचान देगा।

अर्धकुंभ-2027 का धार्मिक कार्यक्रम

धार्मिक आयोजनों की शुरुआत 21 नवंबर 2026 को हरिप्रबोधिनी एकादशी और गोधूलि लग्न में तपस्वियों के नगर प्रवेश से होगी।

इसके बाद 1 दिसंबर 2026 को भैरव अष्टमी के अवसर पर अभिजीत मुहूर्त में अखाड़ों की छावनियों का भूमि पूजन किया जाएगा।

23 दिसंबर 2026 को श्री दत्तात्रेय जयंती पर धर्मध्वजा स्थापना के साथ संन्यासी एवं नागा संन्यासियों की छावनियों में पारंपरिक रोट पूजन संपन्न होगा।

नए वर्ष में 14 जनवरी 2027 को उत्तरायणी पर्व पर सूर्योपासना और पवित्र स्नान के साथ भव्य पेशवाई निकाली जाएगी, जिसमें विभिन्न अखाड़ों के संत और नागा संन्यासी पारंपरिक स्वरूप में शामिल होंगे।

इसके बाद अर्धकुंभ के तीन प्रमुख अमृत स्नान आयोजित किए जाएंगे

6 मार्च 2027 – प्रथम अमृत स्नान
8 मार्च 2027 – सोमवती अमावस्या पर द्वितीय अमृत स्नान
14 अप्रैल 2027 – चैत्र शुक्ल पक्ष अष्टमी पर तृतीय एवं अंतिम अमृत स्नान

इन स्नान पर्वों में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं के हरिद्वार पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

करोड़ों श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारी

संत समाज ने कहा कि अर्धकुंभ-2027 में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधु-संत और विदेशी पर्यटक हरिद्वार आएंगे। इसे देखते हुए धार्मिक आयोजन, आवास, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। अखाड़ों की ओर से भी अपने-अपने शिविरों और धार्मिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। राज्य सरकार भी अर्धकुंभ-2027 को सफल बनाने के लिए विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर रही है। प्रशासनिक स्तर पर सड़क, घाटों का सौंदर्यीकरण, पेयजल, बिजली, पार्किंग, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में कार्य तेज कर दिए गए हैं। सरकार का लक्ष्य है कि हरिद्वार आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही इस आयोजन के माध्यम से उत्तराखंड की धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई मजबूती मिले।

धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि अर्धकुंभ-2027 केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और पर्यटन के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा। आयोजन के दौरान होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार, हस्तशिल्प और छोटे कारोबारों को भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। इसके साथ ही हरिद्वार एक बार फिर वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में दुनिया का ध्यान आकर्षित करेगा।

 

 

 

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