अर्धकुंभ 2027 के लिए जल निगम अलर्ट, पेयजल व्यवस्था पर खर्च होंगे 8.5 करोड़ रुपये..
उत्तराखंड: हरिद्वार में प्रस्तावित अर्धकुंभ मेले को लेकर तैयारियां अब धरातल पर उतरने लगी हैं। करोड़ों श्रद्धालुओं की संभावित आमद को देखते हुए जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए जल निगम ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं को निर्बाध और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए लगभग साढ़े आठ करोड़ रुपये की लागत से अस्थायी जल आपूर्ति ढांचा विकसित किया जाएगा। अर्धकुंभ के दौरान बैरागी कैंप, गौरी शंकर द्वीप, मायापुर, मनसा देवी तथा हर की पैड़ी सहित प्रमुख सेक्टरों में विशेष जलापूर्ति व्यवस्थाएं की जाएंगी। इसके तहत हजारों मीटर लंबी अस्थायी पाइपलाइन बिछाई जाएगी, जबकि विभिन्न स्थानों पर स्टैंड पोस्ट, पीवीसी टैंक और वॉटर कूलर स्थापित किए जाएंगे। इससे मेला क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं, साधु-संतों और अखाड़ों को पर्याप्त मात्रा में पेयजल उपलब्ध हो सकेगा।
करोड़ों श्रद्धालुओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयारी
प्रशासन का अनुमान है कि अर्धकुंभ के दौरान देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचेंगे। गंगा स्नान, धार्मिक अनुष्ठानों और अखाड़ों की पेशवाई के दौरान मेला क्षेत्र में भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे में पेयजल व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए स्थायी जलापूर्ति तंत्र के साथ-साथ अस्थायी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मेला अवधि में घाटों, शिविरों, पार्किंग क्षेत्रों और प्रमुख मार्गों पर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रबंध किए जाएंगे, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
योजना के तहत बैरागी कैंप क्षेत्र में लगभग 3.67 करोड़ रुपये की लागत से जलापूर्ति संबंधी कार्य कराए जाएंगे। वहीं मायापुर, मनसा देवी और हर की पैड़ी सेक्टर में करीब 1.12 करोड़ रुपये की लागत से व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। गौरी शंकर क्षेत्र में लगभग 3.68 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इन क्षेत्रों में अलग-अलग क्षमता और व्यास की दस हजार मीटर से अधिक लंबाई की पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इसके साथ ही बड़ी संख्या में स्टैंड पोस्ट और पीवीसी टैंक लगाए जाएंगे। श्रद्धालुओं को ठंडा और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त संख्या में वॉटर कूलर भी स्थापित किए जाएंगे।
सुरक्षा व्यवस्था को भी मिलेगा मजबूती
जलापूर्ति व्यवस्था के साथ-साथ अग्नि सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मेला क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर फायर हाइड्रेंट लगाए जाएंगे, जिससे किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई संभव हो सके। इसके अतिरिक्त पानी के टैंकरों की भी व्यवस्था रहेगी, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल जलापूर्ति सुनिश्चित की जा सके। मेला अवधि के दौरान जलापूर्ति व्यवस्था के रखरखाव और निगरानी के लिए तकनीकी कर्मचारियों की विशेष टीमें तैनात रहेंगी। तीन शिफ्टों में फिटर, जूनियर फिटर और अन्य तकनीकी कर्मी लगातार व्यवस्था पर नजर रखेंगे, जिससे किसी भी प्रकार की खराबी या बाधा को तुरंत दूर किया जा सके।
अर्धकुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आगमन से स्थानीय व्यापार, पर्यटन, परिवहन, होटल उद्योग और हस्तशिल्प कारोबार को भी बढ़ावा मिलता है। ऐसे में सरकार और प्रशासन का लक्ष्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए एक सुरक्षित, स्वच्छ और सुव्यवस्थित अर्धकुंभ का आयोजन करना है। अधिकारियों का मानना है कि मजबूत जलापूर्ति व्यवस्था से मेला क्षेत्र में भीड़ प्रबंधन आसान होगा और श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के गंगा स्नान, पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियों में शामिल हो सकेंगे। मेला समाप्त होने के बाद अस्थायी रूप से स्थापित की गई व्यवस्थाओं को नियमानुसार हटा दिया जाएगा।
