ट्रिपल इंजन के दावे के बीच उत्तराखंड को इंतजार, यूपी से नहीं मिली अरबों की देनदारी..
उत्तराखंड: उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे से जुड़े कई पुराने मामले अभी तक पूरी तरह सुलझ नहीं पाए हैं। राज्य गठन के वर्षों बाद भी कई विभागों की देनदारियां, कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़ी रकम समेत अन्य वित्तीय मामलों पर अंतिम फैसला नहीं हो सका है। ऐसे में उत्तराखंड को अब भी अपने हिस्से की धनराशि मिलने का इंतजार है। राजनीतिक स्तर पर उत्तराखंड में भाजपा लगातार केंद्र और दोनों राज्यों में अपनी सरकार होने को लेकर ‘ट्रिपल इंजन’ की बात करती रही है, लेकिन परिसंपत्तियों के मुद्दे पर अभी भी समाधान का इंतजार बना हुआ है। कई विभागों का दावा है कि उत्तर प्रदेश से संबंधित आर्थिक मामलों के निपटारे के बाद राज्य को बड़ी राहत मिल सकती है।
वन विकास निगम की करोड़ों की मांग लंबित
परिसंपत्तियों से जुड़े मामलों में उत्तराखंड वन विकास निगम का मामला भी प्रमुख है। निगम की ओर से उत्तर प्रदेश वन विकास निगम से करीब 77 करोड़ रुपये के ब्याज की मांग की जा रही है। यह राशि लंबे समय से लंबित मामलों से जुड़ी है। शासन स्तर पर इस संबंध में उत्तर प्रदेश को प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया पर चर्चा की जा रही है।इसके अलावा सिंचाई विभाग से जुड़े परिसंपत्ति विवाद भी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। दोनों राज्यों के बीच लगातार बातचीत जारी है, लेकिन कई मामलों में सहमति नहीं बन पाई है। उत्तराखंड सरकार की ओर से अपने पक्ष को लगातार रखा जा रहा है। ऊर्जा विभाग से जुड़े कुछ मामले भी उत्तर प्रदेश के साथ लंबित हैं। इनमें टीएचडीसी से संबंधित विषय शामिल हैं। बताया जा रहा है कि पुराने प्रोजेक्टों में किए गए निवेश और उनसे जुड़े निर्णयों की जानकारी जुटाई जा रही है। इसके लिए पुनर्गठन विभाग को अलग-अलग विभागों से संबंधित मामलों की रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि उत्तर प्रदेश सरकार के सामने सभी मुद्दों को एक साथ प्रभावी तरीके से रखा जा सके।
पेंशनरों की देनदारी सबसे बड़ा मुद्दा
परिसंपत्ति विवादों में सबसे अहम विषय कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़ी देनदारियों का है। वित्त विभाग के अनुसार वित्तीय वर्ष 2021-22 और 2022-23 के दौरान उत्तर प्रदेश पर उत्तराखंड की करीब 2261 करोड़ रुपये की देनदारी बताई गई है। इसमें बड़ी राशि पेंशन मद से संबंधित है, जिसका भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है। इसके अलावा सिविल डिपॉजिट मद में करीब 440 करोड़ रुपये की देनदारी का भी मामला सामने आया है। इस संबंध में भी राज्य सरकार की ओर से आगे की कार्रवाई और प्रस्ताव तैयार किए जाने की बात कही जा रही है।शासन स्तर पर अधिकारियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश के साथ परिसंपत्तियों से जुड़े मामलों को लेकर लगातार संवाद किया जा रहा है। कोशिश है कि लंबे समय से चले आ रहे इन विवादों का जल्द समाधान निकाला जाए, जिससे उत्तराखंड को उसका वित्तीय अधिकार मिल सके और लंबित मामलों का निपटारा हो सके। हालांकि विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठाता रहा है कि अनुकूल राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद राज्य अपने अधिकारों से जुड़ी धनराशि हासिल नहीं कर पाया है। वहीं सरकार का कहना है कि सभी लंबित मामलों को नियमों और आपसी सहमति के आधार पर सुलझाने के प्रयास जारी हैं।
